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निशानेबाज: मोबाइल पर भ्रामक खबरों का जाल, प्रिंट मीडिया पर अधिक विश्वास

ऐसे लोगों को बताइए कि पूरी जानकारी के साथ सही खबर समाचार पत्र में मिलती है।इसके अलावा लेख, अग्रलेख, टिप्पणियां आपकी सूचना का विस्तार करते हुए आपको सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।

  • By दीपिका पाल
Updated On: Jul 08, 2025 | 02:06 PM

भ्रामक खबरों का जाल (सौ. डिजाइन फोटो)

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नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, न्यूज शब्द के 4 अंग्रेजी अक्षर चार दिशाओं का संकेत करते हैं- नार्थ, ईस्ट, वेस्ट और साउथ।अब आप बताइए कि न्यूज पेपर पढ़ने में आपकी कितनी रुचि है।बहुत से लोग कहते हैं कि पढ़ने की क्या जरूरत! हमने मोबाइल में सरसरी तौर पर देख लिया है.’ हमने कहा, ‘ऐसे लोगों को बताइए कि पूरी जानकारी के साथ सही खबर समाचार पत्र में मिलती है।इसके अलावा लेख, अग्रलेख, टिप्पणियां आपकी सूचना का विस्तार करते हुए आपको सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।आईएएस परीक्षा पास करनेवालों ने अपनी सफलता का श्रेय नियमित अखबार पढ़ने की आदत को दिया है।

स्थानीय, प्रांतीय, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय ही नहीं अंतरिक्ष के समाचार भी आपको आपका प्रिय अखबार देता है जो सदैव अपने पाठकों के साथ होता है।रेडियो और टीवी की खबर आपकी नजरों से ओझल हो जाती है जबकि अखबार या उसकी कतरन आप सहेज कर रख सकते हैं।विश्व की महान घटनाओं के ऐतिहासिक गवाह समाचार पत्र रहे हैं।हमारे महान नेता भी अखबार निकाल चुके हैं।महात्मा गांधी ने हरिजन और यंग इंडिया, लोकमान्य तिलक ने केसरी और मराठा, जवाहरलाल नेहरू ने नेशनल हेराल्ड और कौमी आवाज जैसे अखबार निकाले थे।डा।आंबेडकर ने मूक नायक और बहिष्कृत भारत नामक समाचार पत्र निकाले थे।

आज के अखबार अधिक जानकारीयुक्त हैं जिनमें राजनीतिक हलचलों के अलावा खेल, मनोरंजन, व्यापार, फीचर, विज्ञान, मौसम, पर्यावरण की सूचना उपलब्ध रहती है।अखबार अपने पाठक को जागृत और अपडेट रखता है.’ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, हमने देखा है कि पत्रकार से लेकर धोबी तक अपनी बाइक या स्कूटर पर ‘प्रेस’ लिखवाते हैं।मीडिया पहले निष्पक्ष और सशक्त हुआ करता था, अब वह भक्त बनता जा रहा है क्योंकि भक्ति में ही शक्ति है.’ हमने कहा, ‘आज भी मीडिया जनता की समस्याओं और आवाज को बुलंद करता है।उसके महत्व को कम मत आंकिए।इलेक्ट्रानिक मीडिया आने के बाद भी प्रिंट मीडिया का महत्व कम नहीं हुआ है।

प्रिंट मीडिया या अखबारों को ज्यादा विश्वसनीय माना जाता है।यह अखबार ही है जो सवाल करता है कि दक्षिण अमेरिका के देशों का दौरा करनेवाले प्रधानमंत्री पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर का दौरा करने के लिए समय क्यों नहीं निकाल पा रहे हैं?’

लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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Published On: Jul 08, 2025 | 02:06 PM

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