
डोनाल्ड ट्रंप की तीसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बनने की चाह (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तय किया है कि वह 2028 में भी तीसरी बार अपने देश के प्रेसीडेंट बनेंगे. यह कैसा दुराग्रह है? अमेरिकी संविधान का 22वां संशोधन किसी भी नेता को 2 टर्म से अधिक राष्ट्रपति बनने की अनुमति नहीं देता।
यह संशोधन इसलिए किया गया था क्योंकि फ्रैंकलिन बी. रूजवेल्ट 4 बार राष्ट्रपति चुने गए और अपने चौथे टर्म की शुरूआत में ही पक्षाघात या लकवे के शिकार हो गए. उनके बाद राष्ट्रपति बने हैरी एस. ट्रुमेन के कार्यकाल में 22वां संविधान संशोधन किया गया जिससे कोई भी राष्ट्रपति 2 टर्म अर्थात 8 वर्ष से ज्यादा अपने पद पर नहीं रह सकता चाहे वह कितना ही बड़ा तोपचंद हो. इसके बाद आइजनहावर, केनेडी, रिचर्ड निक्सन, फोर्ड, जिमी कार्टर, रोनाल्ड रीगन, जॉज बुश पिता-पुत्र, क्लिंटन, ओबामा, बाइडन जैसे कोई भी राष्ट्रपति एक या 2 टर्म से ज्यादा अपने पद पर नहीं रहे।
हमने कहा, ‘आपको मालूम नहीं कि ट्रंप कितने चालाक हैं. वे हर समस्या का अपने तरीके से हल निकाल लेते हैं. वे ऐसे बिल्डर हैं जो पार्किंग की जगह पर भी दुकानें निकाल लेते हैं. रेत में से तेल निकालना उन्हें आता है. उन्होंने 22वें संविधान संशोधन के प्रतिबंध से बचने और तीसरी बार राष्ट्रपति बनने का अनोखा फार्मूला खोज निकाला है. अमेरिकी संविधान में एक प्रावधान है कि यदि कोई राष्ट्रपति अचानक इस्तीफा दे दे या चल बसे तो वहां का वाइस प्रेसीडेंट तुरंत प्रेसीडेंट पद की शपथ ले लेता है।
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इसलिए ट्रंप 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में अपने उपराष्ट्रपति जेडी वांस को खड़ा करेंगे और खुद उपराष्ट्रपति बन जाएंगे. उनके आज्ञाकारी वांस चुने जाने के एक-दो महीने बाद प्रेसीडेंट पद से इस्तीफा दे देंगे। उनकी खाली जगह पर ट्रंप राष्ट्रपति पद की शपथ ले लेंगे. इसे कहते हैं सिर के पीछे से घुमाकर कान को पकड़ना! अब आप समझ सकते हैं कि ट्रंप कितनी चालू चीज हैं.’ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, यदि वांस ने इस्तीफा नहीं दिया तो ट्रंप का प्लान फेल हो जाएगा.’ हमने कहा, ‘जहां मिलीभगत हो, वहां प्लान फेल नहीं, कामयाब होते हैं।’






