Trump Iran War Protests ( Source: Social Media )
Donald Trump Iran War Protests: पूरे अमेरिका में 80 लाख से ज्यादा लोग 3,300 जगहों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के विरुद्ध छेड़े गए युद्ध के खिलाफ ‘नो किंग्स रैली’ के रूप में उतर आए। अमेरिका में बहुत बड़े पैमाने पर लोग ईरान के विरुद्ध छेड़े गए युद्ध से नाराज हैं।
उन्होंने ट्रंप के सख्त इमिग्रेशन कानून और महंगाई के मुद्दों को भी शामिल करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप और उप-राष्ट्रपति जेडी बेंस के इस्तीफे की मांग की। इससे पहले भी अमेरिका में ईरान युद्ध के विरुद्ध प्रदर्शन हुए हैं, लेकिन रविवार का प्रदर्शन हैरान करने वाला था।
यूरोप में भी बहुत सी जगहों में इस युद्ध के खिलाफ लोग गोलबंद हो रहे हैं। जिस तरह इजराइल अपने 50 फाइटर जेट के साथ ईरान के एटॉमिक ठिकानों पर हमला कर रहा था और ईरान के समर्थन में हुती विद्रोही, इजराइल पर बैलेस्टिक मिसाइलों से हमला करके इस आग में घी डालने का काम कर रहे थे, उससे लगता है कि जंग थमने के जो आसार पैदा हुए थे, वह अब दोगुने वेग से जंग को फैलाने वाले हो गए हैं।
1 अप्रैल 2026 से रूस 4 महीनों तक पेट्रोल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रहा है, उससे न केवल भारत, चीन, ब्राजील और तुर्किये जैसी तेजी से विकास कर रही अर्थव्यवस्थाओं पर लगाम लगने के आसार बढ़ गए हैं, बल्कि विश्च मंदी काफी नजदीक आ चुकी है।
अमेरिका में मुद्रास्फीति की दर युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 1.5 फीसदी तक बढ़ चुकी है। इससे दुनिया के कम से कम 3 अरब लोगों पर अगले कई महीनों तक लगभग 5000 से 7000 रुपये प्रति माह का दबाव बन रहा है।
शेयर बाजार, प्रॉपर्टी बाजार और सर्राफा बाजार में गिरावट का माहौल है। दुनिया की अर्थव्यवस्था जिन 3 सबसे ज्यादा रूसी तेल खरीदारों की बदौलत आगे बढ़ रही हैं, उसमें चीन, भारत और तुकिये की अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं।
चीन करीब 63,100 करोड़ रुपये का और भारत करीब 23,000 करोड़ रुपये का तेल, रूस से आयात करता है। जिस तरह से तेल की किल्लत बढ़ रही है, वह वैश्विक तबाही की तरफ बढ़ने का संकेत है।
30 दिनों की बमबारी झेलकर ईरान लगभग तहस-नहस हो चुका है। लेकिन सैन्य पलटवार करने का उसमें फिदाइन आत्मविश्वास मौजूद है। ईरान के साथ-साथ इन दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं भी तहस-नहस हो जाएंगी और इनका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा।
अमेरिका 850 से ज्यादा टॉम हाँक क्रूज मिसाइलें ईरान पर दाग चुका था और इससे भी ज्यादा मिसाइलें और बम इजराइल ने ईरान पर बरसाए हैं जिस कारण अमेरिका के इतिहास में पहली बार हथियारों और गोला-बारूद की भारी कमी हो गई है।
इजराइल भी आर्थिक रूप से पस्त हो चुका है। इसलिए वक्त आ गया है कि अब चीन, रूस, भारत और ब्राजील मिलकर इस युद्ध को रुकवाने में हर हालत में सक्रिय हस्तक्षेप करें वरना हाथ पर हाथ धरे रहने की कीमत अगले कई वर्षों तक पूरी दुनिया की जनता को चुकानी पड़ेगी।
क्योंकि अभी तक अनुमान ये है कि अगर आज की तारीख में भी युद्ध रुक जाता है, तो भी इस युद्ध से तीनों सीधे शामिल देशों और अप्रत्यक्ष रूप से आधा दर्जन दूसरे देशों की अर्थव्यवस्थाओं को हुए नुकसान के साथ दुनिया के व्यापार कारोबार और अर्थव्यवस्था को जो चोट पहुंचती है, उसके चलते 30 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की पूंजी ताहस-नहस हो चुकी हैं।
मतलब अमेरिका की अब तक इस युद्ध में बलि चढ़ चुकी है और अगर यह तुरंत नहीं रुका तो अगले कुछ महीनों में कई देश जलकर राख हो जाएंगे, जिसकी दशकों तक दुनिया को भरपाई करनी पड़ेगी।
30 दिनों की बमबारी झेलकर ईरान लगभग तहस-नहस हो चुका है। लेकिन सैन्य पलटवार करने का उसमें फिदाइन आत्मविश्वास मौजूद है। ईरान के साथ-साथ इन दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं भी तहस-नहस हो जाएंगी और इनका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा।
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अमेरिका 850 से ज्यादा टॉम हॉक क्रूज मिसाइलें ईरान पर दाग चुका था और इससे भी ज्यादा मिसाइलें और बम इजराइल ने ईरान पर बरसाए हैं जिस कारण अमेरिका के इतिहास में पहली बार हथियारों और गोला-बारूद की भारी कमी हो गई है।
लेख-लोकमित्र गौतम के द्वारा