11 लाख करोड़ का भूकंप और 5 ट्रिलियन इकोनॉमी का सपना, सामना में मोदी सरकार पर उद्धव गुट का तंज

Saamana Editorial on Stock Market Crash: शेयर बाजार में 11 लाख करोड़ की गिरावट पर 'सामना' ने मोदी सरकार को घेरा। ईरान युद्ध और गिरते रुपये को लेकर 5 ट्रिलियन इकोनॉमी के सपने पर तंज कसा।
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Saamana Editorial on Stock Market Crash (फोटो क्रेडिट-X)
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Saamana Editorial On Rupee vs Dollar: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार (23 मार्च, 2026) को आए भीषण 'भूकंप' ने निवेशकों के 11 लाख करोड़ रुपये स्वाहा कर दिए। इस आर्थिक गिरावट को लेकर शिवसेना (UBT) के मुखपत्र 'सामना' ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। संपादकीय में तंज कसते हुए पूछा गया है कि 5 ट्रिलियन इकोनॉमी का सपना दिखाने वाली सरकार क्या इस 11 लाख करोड़ के झटके से हिल पाएगी?

'सामना' ने इस गिरावट के लिए सीधे तौर पर पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध और सरकार की कमजोर आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।

11 लाख करोड़ का 'भूकंप' और 5 ट्रिलियन का 'शिगूफा'

सोमवार को सेंसेक्स में 1,800 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निफ्टी 22 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। 'सामना संपादकीय', “11 लाख करोड़ का भूकंप… क्या हिल जाएगी सरकार” में लिखा गया कि मोदी सरकार उठते-बैठते जनता को पांच ट्रिलियन इकोनॉमी का सपना दिखाती है, लेकिन हकीकत यह है कि एक झटके में निवेशकों की जीवनभर की कमाई उड़ गई। लेख के अनुसार, यह गिरावट केवल बाजार का उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि निवेशकों के टूटते भरोसे का प्रतीक है।

ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट

संपादकीय में विश्लेषण किया गया कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत की रसोई और उद्योगों पर पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से व्यापारिक आवाजाही प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल और गैस के आयात पर संकट खड़ा हो गया है। 'सामना' ने तंज कसा कि सरकार चाहे कितना भी वैश्विक शक्ति होने का दिखावा कर ले, लेकिन हकीकत यह है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण भारत की उत्पादन लागत बढ़ रही है और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव साफ दिख रहा है।

रुपये की ऐतिहासिक गिरावट और विदेशी निवेशकों का पलायन

लेख में रुपये की बदहाली पर भी चिंता जताई गई है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 93.89 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है और इसके 95 तक जाने का अंदेशा है। 'सामना' ने खुलासा किया कि पिछले 15 दिनों में विदेशी निवेशकों (FIIs) ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचकर भारत से अपना हाथ खींच लिया है। संपादकीय में सवाल उठाया गया, "विदेशी निवेश में लगी इस भयानक गिरावट और रुपये की तेज फिसलन को सरकार कैसे रोकेगी? क्या सरकार की बंद आंखें इस तबाही को देख पाएंगी?"

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