नवभारत संपादकीय: अमेरिका-ईरान वार्ता अटकी, इजराइल के हमलों से शांति प्रक्रिया पर संकट
US Iran Talks: अमेरिका-ईरान वार्ता स्थगित होने व इजराइल के लगातार हमलों से पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों पर सवाल उठे हैं। ट्रंप युद्ध खत्म करना चाहते हैं लेकिन इजराइल अपने सुरक्षा रुख पर अड़ा है।
- Written By: अंकिता पटेल
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू,(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Middle East Peace Crisis: स्विटजरलैंड में अमेरिका व ईरान के बीच वार्ता स्थगित हो जाने से युद्ध समाप्त होने को लेकर संदेह व्याप्त हो गया है। दोनों पक्षों के बीच फ्रांस में प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद भी शांति स्थापना को लेकर इसलिए शक था, क्योंकि इस प्रक्रिया में इजराइल को शामिल नहीं किया गया था।
इजराइल ने लेबनान में हिजबुल्लाह पर हमले जारी रखे जिसकी वजह से अमेरिका व ईरान शांति समझौता खटाई में पड़ गया। यद्यपि इजराइल व हिजबुल्लाह में संघर्ष विराम पर सहमति बनी है। लेकिन इसके 8 घंटे बाद ही इजराइल ने दक्षिणी लेबनान पर हवाई हमले किए जिसमें 16 लोग मारे गए।
ट्रंप और फिर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैन्स ने इजराइल को फटकार सुनाई है लेकिन इजराइल अपने स्टैंड से पीछे हटने वाला नहीं है। वह ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई रियायतों से नाराज है। इजराइल हिजबुल्ला व ईरान को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा महसूस करता है। अमेरिका इस युद्ध से कदम वापस खींचना चाहता है, क्योकि इससे अमेरिका की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है और ईंधन के दाम बढ़े हैं।
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संघर्ष विराम के बावजूद मतभेद बरकरार, ट्रंप और नेतन्याहू पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
ट्रंप के कितने ही समर्थक भी युद्ध के पक्ष में नहीं है। इसलिए ट्रंप शांति समझौता चाहते हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैन्स ने भी इजराइल को चेतावनी दी है कि वह अपने मित्र एकमात्र शक्तिशाली अमेरिका को खुश और संतुष्ट रखे। उधर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर उनकी पार्टी और सहयोगियों का दबाव है कि ईरान को पूरी तरह परमाणु शख विहीन करवाने के अपने लक्ष्य से पीछे न हटें।
संघर्ष विराम के बावजूद दक्षिण लेबनान में इजराइली फौज की मौजूदगी बनी हुई है। इससे इजराइल के भविष्य के इरादों का पता चलता है। नेतन्याहू के जोर देने की वजह से अमेरिका इस युद्ध में उतरा था।
ट्रंप का रवैया भी ढुलमुल बना हुआ है। पहले तो उन्होंने कहा कि अमेरिका इरान के पुनर्निर्माण के लिए क्षेत्रीय सहयोगियों को साथ लेकर 300 अरब डॉलर की मदद करेगा लेकिन फिर ट्रंप ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई के बयान से नाराज हो गए और कहा कि अमेरिका ईरान को फूटी कौड़ी भी नहीं देगा।
समझौते के बाद भी बयानबाज़ी तेज, अमेरिका-ईरान के बीच भरोसे का संकट बरकरार
खामेनेई ने कहा कि समझौते के लिए अमेरिका व ट्रंप ही ज्यादा उत्सुक थे। डोनाल्ड ट्रंप खामेनेई पर इतने नाराज हैं कि उन्होंने कहा कि अब ईरान के पास न प्रभावी वायुसेना बची है न नौसेना, न पर्याप्त एंटी एयरक्राफ्ट सिस्टम न रडार।
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अमेरिका ईरान को किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता देने के पक्ष में नहीं है। 60 दिनों का संघर्ष विराम एक परीक्षा के समान है। ईरान के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर कर ट्रंप ने यह दावा किया है कि उसने युद्ध खत्म करते हुए तेल सप्लाई का रास्ता खोल दिया है। उधर ईरान की संसद के स्पीकर बघेर घलीबाफ ने कहा कि यह डील अमेरिका की विफलता को दिखाता है। अमेरिका युद्ध में अपने उद्देश्यों को हासिल करने में विफल रहा है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
