नवभारत विशेष: रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ की तैयारी, भारत-चीन पर बढ़ा अमेरिकी दबाव

Russian Oil Tariffs: रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका 100% तक टैरिफ लगा सकता है। सीनेट में बिल पास होने के बाद भारत और चीन समेत प्रमुख खरीदारों पर दबाव बढ़ गया है।
Navbharat Special: Plans for 100% tariff on countries buying Russian oil; US pressure mounts on India and China.
भारत-चीन पर 100% टैरिफ का खतरासोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो
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India China US Tariffs: भारत व चीन आदि देशों पर अमेरिका 100 प्रतिशत टैरिफ लगा सकता है, क्योंकि वह रूस के पेट्रोलियम उत्पाद के मुख्य खरीदार हैं। अमेरिका का तर्क है कि इस खरीदारी के चलते ही रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखे हुए है। अमेरिकी सीनेट ने 7 अगस्त को इस संदर्भ में एक विधेयक 86-11 के प्रभावी अंतर से पारित किया।

इजराइल की विस्तारवादी नीति के कट्टर समर्थक लिंडसे ग्राहम का विचार था कि रूस को नियंत्रित करने और यूक्रेन युद्ध को बंद करवाने के लिए आवश्यक है कि जो देश रूस के पेट्रोलियम उत्पाद खरीदते हैं, उन पर भारी-भरकम टैरिफ लगाया जाए।

रिपब्लिकन सीनेटर ग्राहम की हाल में मृत्यु (11 जुलाई 2026) के बाद सम्मान स्वरूप विधेयक में भी उनका नाम जोड़ दिया गया। इस विधेयक के पारित होने से ट्रंप को यह छूट मिल जाती है कि वह उन देशों की गु पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाएं, जो रूसी तेल व गैस आयात करते हैं। वर्तमान में रूसी तेल व गैस को आयात करने वाले टॉप 5 देश हैं- चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया।

रूस पर प्रतिबंधों से तेल-महंगाई का संकट गहराने की आशंका

रूस पर पाबंदियों के अतिरिक्त इस विधेयक की अवधि का विस्तार 2031 तक रहेगा। लिंडसे ग्राहम के साथ मिलकर इस विधेयक की कल्पना डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भी की थी, जिनका अब मानना है कि पाबंदी व टैरिफ से उन देशों पर हथौड़े जैसी मार पड़ेगी, जो 'बहादुर आजाद लोगों' के विरुद्ध युद्ध में 'सांठगांठ' किए हुए हैं।

यह सही है कि युद्ध कहीं भी हो, किसी समस्या का समाधान नहीं है, लेकिन जो लोग गाजा में नरसंहार व ईरान पर बेमतलब युद्ध पर मूकदर्शक बने रहते हैं, उनके मुंह से उपदेश अच्छे नहीं लगते। ट्रंप की मिसाइलों व टैरिफ युद्ध के कारण तो पूरी दुनिया तेल, खाद, महंगाई आदि के संकट से दो चार हो रही है।

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ट्रंप के टैरिफ युद्ध पर डेमोक्रेट्स का हमला

डेमोक्रेट कांग्रेसमेन ग्रेगोरी मीक्स व डॉन बेयर ने इस विधेयक की कड़ी आलोचना की है। उनके अनुसार इससे डोनाल्ड ट्रंप को बेलगाम टैरिफ अधिकार मिल जाएंगे, जिसका वह बेरोक-टोक हथियार के रूप में प्रयोग करेंगे। अगर इस विधेयक को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्ज की मंजूरी भी मिल जाती है, तो ट्रंप को खुलकर अपना टैरिफ युद्ध खेलने का अवसर मिल जाएगा।

इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि ट्रंप के टैरिफ युद्ध से अमेरिका को ही अधिक नुकसान होगा। ट्रंप द्वारा ग्लोबल व्यापार युद्ध छेड़ने का नतीजा यह हुआ है कि अनेक देश, जिनमें अमेरिका के करीबी सहयोगी भी शामिल हैं, बिना अमेरिका के अपने आर्थिक समझौते कर रहे हैं।

ट्रंप की टैरिफ नीति से भारत में 82% लोग नाखुश

अगर वॉशिंगटन अपने व्यापार के इर्दगिर्द ऊंची दीवार खड़ी कर रहा है, तो बाकी देश अपनी दीवारों को छोटा कर रहे हैं। इस बीच भारत ने भी अनेक द्विपक्षीय व्यापार समझौते किए हैं। रूस का कारोबार बदस्तूर चल रहा है, वह चीन आदि को अपना तेल दे रहा है, जिसे अमेरिका टैरिफ की किसी मात्रा से नहीं रोक सकता।

चार दशकों की पाबंदियों के बावजूद ईरान अपना तेल चीन को बेच रहा है। ट्रंप अपने बड़बोलेपन, विकृत दृष्टिकोण और फेक दावों के बल पर अपनी मनमर्जी करते हैं, जिसका नतीजा है कि उनकी वैश्विक छवि निरंतर निचले पायदान की ओर गिरती जा रही है।

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इस विधेयक के रूप में उनके हाथ जो नया हथियार लगा है, उससे बात अतिरिक्त बिगड़ेगी। 36 देशों के 74 प्रतिशत वयस्क ट्रंप की ईरान नीति से सहमत नहीं हैं। ट्रंप की टैरिफ नीतियां भी लोगों को पसंद नहीं हैं, खासकर उन देशों में जिनसे अमेरिका का व्यापार है, भारत में तो 82 प्रतिशत लोग इनके विरोध में हैं। ट्रंप की साख बचे या न बचे, अगर अमेरिका को अपनी साख बचानी है, तो हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्ज को ग्राहम विधेयक ठुकराना होगा।

लेख- शाहिद ए चौधरी के द्वारा

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