UPSC ने नियुक्ति की रद्द, धोखेबाज पूजा खेड़कर का फ्राड आया सामने
पूजा खेड़कर की धोखाधड़ी के बाद यूपीएससी सतर्क हो गया। वह 2009 से 2023 तक नियुक्त किए गए सभी आईएएस अधिकारियों के प्रमाणपत्रों, जाति संबंधी दावों के अलावा उनके क्रीमीलेयर में नहीं होने के मामलों की गहराई से जांच करेगा।
- Written By: किर्तेश ढोबले
(डिजाइन फोटो)
नवभारत डेस्क: ऐसा पहली बार हुआ है कि केंद्रीय लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) ने किसी आईएएस अधिकारी के खिलाफ बेहद सख्त एक्शन लेते हुए उसकी नियुक्ति रद्द की है। अब वह कभी सिविल सेवा की परीक्षा नहीं दे सकेगी। महाराष्ट्र कैडर की प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी पूजा खेड़कर के साथ जो हुआ उसके लिए वह स्वयं पूरी तरह दोषी है। जैसी करनी वैसी भरनी! यूं तो पूजा ने बहुत बड़ा फ्राड किया था लेकिन ट्रेनी होने के बावजूद अपनी व्यक्तिगत कार में लालबत्ती लगाने और महाराष्ट्र सरकार लिखवाने की वजह से वह शक के दायरे में आई।
पुणे के जिलाधिकारी सुहास दिवसे की शिकायत के बाद पूजा का ट्रांसफर वाशिम कर दिया गया था। पूजा और उसके परिवारजनों का रवैया चोरी और सीनाजोरी वाला था। अरबपति परिवार की क्रीमीलेयर में होने पर भी यूपीएससी कोटे में आने के लिए पूजा ने ओबीसी श्रेणी का फर्जी सर्टिफिकेट पेश किया था। धोखाधड़ी यहीं नहीं रुकी, उसने खुद को मानसिक दिक्कत होने व नजर कमजोर होने की बात कही और बाएं घुटने में लोकोमोटर दिव्यांगता की बात भी कही। यूपीएससी में ऐसे लोगों का दिव्यांग कोटा होता है। जब पूजा के आईएएस बनने की जांच हुईं तो उसके झूठ की परतें खुलती चली गई।
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पूजा ने यूपीएससी की आंखों में धूल झोंककर आईएएस पद तो हासिल कर लिया लेकिन कुर्सी मिलने से पहले ही उसकी बहुत बड़ी धोखाधड़ी सबके सामने आ गई। यूपीएससी ने जांच में पाया कि पूजा ने अपना नाम, माता-पिता का नाम, सिग्नेचर, फोटो, ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर और पता बदलकर प्रतियोगी परीक्षा दी। यूपीएससी ने 15 वर्षों का डेटा खंगाला फिर भी पता नहीं चल सका कि पूजा खेडकर ने कितनी बार यूपीएससी परीक्षा दी क्योंकि उसने हर बार न केवल खुद का बल्कि माता-पिता का नाम भी बदल लिया था।
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पूजा का चयन 2023 के बैच में हुआ था। प्रशिक्षण के दौरान उसके व्यवहार को लेकर कई शिकायतें आई थीं। यूपीएससी यह भी जानना चाहता था कि क्या पूजा को सचमुच मानसिक बीमारी है और उसकी नजरें कमजोर हैं? इसके लिए आयोग ने 6 बार एम्स में डाक्टरों का अपॉइंटमेंट लिया लेकिन पूजा हर बार बहाना बनाकर टेस्ट से बचती रही। जांच में उसके मानसिक दिक्कत और चीजें याद न रख पाने के सर्टिफिकेट को भी फर्जी माना गया।
जाहिर है कि बिना फर्जी सर्टिफिकेट के वह आईएएस बन ही नहीं सकती थी क्योंकि क्रीमीलेयर ओबीसी के लिए यूपीएससी में कोई कोटा नहीं है। ऐसे ही उसके दिव्यांगता के सर्टिफिकेट भी फर्जी निकले। इस बड़ी धोखाधड़ी के बाद यूपीएससी सतर्क हो गया। वह 2009 से 2023 तक नियुक्त किए गए सभी आईएएस अधिकारियों के प्रमाणपत्रों, जाति संबंधी दावों के अलावा उनके क्रीमीलेयर में नहीं होने के मामलों की गहराई से जांच करेगा। लेख चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा
