1.39 करोड़ में पड़ा शाह का खाना (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, सभ्यता और शालीनता का तकाजा है कि किसी की थाली पर नजर नहीं डालना चाहिए. कोई सोने-चांदी के वर्क से लिपटी मिठाई खाए अथवा छप्पन भोग का आनंद ले, उधर झांकने की कोई जरूरत नहीं है। हिंदी में कहावत है- रूखी-सूखी खाय के ठंडा पानी पी, देख पराई चोपड़ी क्यों ललचाए जी! इसका अर्थ है कि रूखा-सूखा जो भी मिले, खाकर ठंडा पानी पी लो लेकिन दूसरे की घी चुपड़ी हुई रोटी को देखकर लालच में मत पड़ो।हर कोई अपनी किस्मत से खाता है।’
हमने कहा, ‘आपको पता भी है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की शाही थाली 1.39 करोड़ रुपए की पड़ी. इसे लेकर राकां (शरद पवार) के विधायक जितेंद्र आव्हाड और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता राजू शेट्टी ने तीखी आलोचना की है। अब आप सोच में पड़ जाएंगे कि अमित शाह का भोजन इतना महंगा कैसे पड़ गया! हुआ यह कि रायगड़ किले पर छत्रपति शिवाजी महाराज के पुण्यतिथि कार्यक्रम के बाद अमित शाह, अजीत पवार गुट के प्रदेशाध्यक्ष व सांसद सुनील तटकरे के आमंत्रण पर उनके यहां भोजन करने सुतारवाड़ी गए।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, इसमें गलत क्या है! किला चढ़ने के परिश्रम के बाद भूख लगना स्वाभाविक है. कोई प्रेम से खाने के लिए निमंत्रित करे तो वहां अवश्य जाना चाहिए. भगवान कृष्ण ने विदुर के यहां जाकर भोजन किया था और सुदामा के पोहे खाए थे।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, अमित शाह के हेलीकाप्टर की लैंडिंग व टेक आफ के लिए सुतारवाड़ी में 1 करोड़ 39 लाख रुपए की लागत से हेलीपैड बनाया गया. इससे समझ जाइए कि यह भोजन कितना महंगा पड़ा. जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि यदि शाह को इतनी भूख लगी थी तो मैं खुद उनके लिए पेण से रायगड़ खाने का टिफिन लेकर आता. इससे खर्च बच जाता. राजू शेट्टी ने कहा कि सुनील तटकरे के घर एक कटोरी आम का रस और एक मोदक खाने पर 1.39 करोड़ रुपए खर्च किए गए।
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लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा