नवभारत विशेष: तमिलनाडु में विजय ने लिखी कामयाबी की कथा, 108 सीटों के साथ TVK नंबर-1; राजनीति में नया समीकरण
Tamil Nadu Elections: तमिलनाडु में TVK ने पहली बार चुनाव लड़कर 108 सीटें जीत लीं और सबसे बड़ी पार्टी बन गई। इस जीत ने DMK और AIADMK को बड़ा झटका दिया है।
- Written By: अंकिता पटेल
तमिलनाडु चुनाव परिणाम, थलपति विजय ,(सोर्स: सोशल मीडिया)
TVK Wins Tamil Nadu: मशहूर समाजशास्त्री और सेफोलॉजिस्ट योगेंद्र यादव कहते हैं, ‘टीवीके ने तमिल राजनीति में इतना बड़ा उलटफेर किया है, जिसकी आम चुनाव विश्लेषकों की तो छोड़िए, राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले किसी भी विशेषज्ञ ने कल्पना तक भी नहीं की थी।’ टीवीके का यह पहला चुनाव प्रदर्शन ही इतना जबर्दस्त रहा है कि पहली बार में ही 234 सीटों में से 108 सीटें जीतकर तमिलनाडु की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी है।
उसने इस चुनाव में 34.92 प्रतिशत वोट हासिल किए, जो तमिलनाडु की सभी राजनीतिक पार्टियों में से सबसे ज्यादा है। इस बार के चुनाव में (डीएमके) ने 59 सीटें हासिल की, वहीं दूसरी प्रमुख प्रतिद्वंदी (एआईएडीएमके) और उसके समूचे गठबंधन को कुल मिलाकर 47 सीटें मिलीं हैं, जो कि 2021 के मुकाबले 19 सीटें कम हैं। क्योंकि 2021 में एआईएडीएमके को 66 सीटें मिली थीं, जबकि तब डीएमके को 133 सीटें मिली थीं, इस बार उसे 73 सीटें कम मिली हैं।
टीवीके 35% वोट के साथ सबसे आगे, विजय का दमदार प्रदर्शन
इस तरह देखा जाए तो डीएमके को जहां 24 फीसदी, एआईएडीएमके को 21 फीसदी, कांग्रेस को 3 फीसदी, बीजेपी को लगभग 3 फीसदी और अन्य सभी पार्टियों को मिलाकर करीब 13.5 फीसदी वोट मिले हैं। वहीं इन सबसे ज्यादा टीवीके ने अकेले करीब 35 फीसदी वोट हासिल किए, जो कि डीएमके से 10 फीसदी और एआईएडीएमके से 14 फीसदी से ज्यादा हैं। अभिनेता से नेता बने थलापति विजय ने अपने अविश्वसनीय प्रदर्शन से राजनीति की सफल इबारत लिख दी है।
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युवा फोकस और साफ छवि से विजय की जीत
सवाल है उन्होंने आखिर यह सफलता हासिल कैसे की? उनकी रणनीति युवा मतदाताओं पर फोकस, भ्रष्टाचार विरोधी छवि और फिल्मी लोकप्रियता की कामयाबी का कॉकटेल है। उनकी भावनात्मक अपील और ठोस वायदों के समीकरण ने मतदाताओं को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाई है।
उनका करिश्माई व्यक्तित्व, साफ-सुथरी छवि और पारंपरिक जातीय तथा द्रविड़ समीकरणों की राजनीति को पीछे छोड़ना थलापति विजय की एक बहुत बड़ी कामयाबी है, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या तमिलनाडु से द्रविड़ियन राजनीति की विदाई हो जाएगी? जिस तरह से टीवीके ने डीएमके और एआईएडीएमके दोनों को हतप्रभकरते हुए सत्ता की पहली दावेदार बनकर उभरी है, उससे यह तो माना ही जा सकता है कि तमिलनाडु का मतदाता अब परंपरा से ज्यादा प्रदर्शन और विकल्प को प्राथमिकता दे रहा है।
वायदों पर खरा उतरना अब विजय के लिए असली परीक्षा
अगर टीवीके अपने किए गए वायदों पर खरी नहीं उतरती तो यह भी कहने में किसी को शायद ही परहेज हो कि इस चुनाव में तमिलनाडु के केजरीवाल बनकर उभरे विजय का भी हम्र वही होगा, जो दिल्ली की राजनीति में चमचमाते सूरज के रूप में उभरे केजरीवाल का हुआ है। लेकिन इस बात का श्रेय तो देना ही होगा कि किस तरह विजय ने प्रदेश के लोगों को एक नया सपना, एक नया विकल्प दिया है।
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इस बार के चुनाव में टीवीके ने जो कामयाबी हासिल की है, वैसी कामयाबी दोनों द्रविड़ दल मिलकर भी नहीं हासिल कर सके। यह विजय की अकेली स्टार पावर नहीं है बल्कि उनका मतदाताओं के साथ यह सही वेवलेंथ पर राजनीतिक कनेक्ट है। तमिलनाडु के मतदाताओं को कुछ तो उनमें ऐसा दिखा होगा, जो सारे स्थापित राजनेताओं पर भारी पड़ा है।
करिश्माई व्यक्तित्व, स्वच्छ छवि
तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय चंद्रशेखर उर्फ थालापति विजय की तमिलगा बेट्री कझगम (टीवीके) ने न केवल चुनावी समीकरण बदल दिए हैं बल्कि पिछले 6 दशक से प्रदेश की राजनीति की दिशा तय कर रही द्रविड़ियन राजनीति की जड़ों को चुनौती दी है। पोल एजेंसी ‘एक्सेस माय इंडिया’ ने भविष्यवाणी की थी कि तमिलनाडु की राजनीति में उलटफेर हो सकता है, टीवीके किंगमेकर की जगह खुद किंग बनकर उभर सकती है। इस पोल एजेंसी का मानना था कि टीवीके इस चुनाव में 98 से 120 सीटें जीत सकती है।
लेख- नरेंद्र शर्मा के द्वारा
