Navabharat Nishanebaaz: गंगोत्री से गंगासागर तक कमल, क्या है इसका सांस्कृतिक महत्व?, आस्था से सियासत तक

BJP Lotus Symbolism: कमल भारतीय संस्कृति में पवित्रता और आस्था का प्रतीक है। आज यह धर्म के साथ राजनीति में भी अहम स्थान रखता है, जिससे इसके महत्व पर नई चर्चा हो रही है।
Navabharat Nishanebaaz: Lotus from Gangotri to Gangasagar, what is its cultural significance?, from faith to politics
कमल का महत्व,(सोर्स: सौजन्य AI)
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Lotus Symbolism Indian Politics: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, हमें आश्चर्य हो रहा है कि गंगोत्री से गंगासागर तक कमल खिल गए हैं। उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार और अब बंगाल में भी यही नजारा है। हर राज्य को बीजेपी का सहारा है। हमें लगता है कि मोदी के करकमलों का कमाल सारे देश में देखा जा रहा है। बीजेपी माने जीत की गारंटी।'

हमने कहा, 'निश्चित रूप से कमल हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति से जुड़ा है। लक्ष्मी को कमला और भगवान विष्णु को कमलापति कहा जाता है। उनके 4 हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म (कमल) है। धन की देवी लक्ष्मी भी कमल के आसन पर विराजती हैं। विष्णु की नाभि से निकाले कमल पर ब्रम्हा विराजमान हैं जिन्होंने सृष्टि की रचना की। भगवान राम को कमलनयन कहा जाता है। जब शिवजी की पूजा में एक कमल का फूल कम पड़ गया था, तो राम अपना नेत्र अर्पित करने जा रहे थे तभी शिव ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया और रावण पर विजय पाने का आशीर्वाद दिया।'

पड़ोसी ने कहा, 'कमल में विशेषता है कि जब कोई भौरा उसके रूप पर मुग्ध होकर कमल पर बैठ जाता है तो पंखुड़ियां बंद होने पर वह वहीं कैद होकर दम तोड़ देता है। देखिए बीजेपी का कमल खिला तो 3 टर्म पुरानी ममता की टीएमसी ने दम तोड़ दिया।'

हमने कहा, 'कमल की महिमा अपरंपार है। बीजेपी का अमोघ शत्र 'ऑपरेशन लोटस' है जिससे वह विपक्षी पार्टियों का विभाजन करवा देती है। राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना को निशाना बनाने के लिए इसी का इस्तेमाल किया गया था। झाडू वाले केजरीवाल के 7 महारथी राज्यसभा सदस्य भी कमल की ओर खिंचे चले आए, बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के तिनके बिखर गए और जबरदस्त परिवर्तन हो गया, असम और बंगाल में बीजेपी की सत्ता का मतलब घुसपैठियों की शामत आना है। चुनाव आयोग के एसआईआर रूपी मिसाइल ने उन वोटों का पहले ही सफाया कर दिया था, जो टीएमसी को मिलने वाले थे। अब बंगालवासी कमल को देखकर कह सकेंगे तुम मिले दिल खिले, अब जीने को क्या चाहिए।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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