निशानेबाज: 20 जनवरी से शुरू होगी ट्रम्प की बारी, पूंजीपति मित्र मस्क से बढ़ती यारी
अमेरिका के नए राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प 20 जनवरी को अपना पद संभालेंगे। ऐसा माना जाता है कि अनधिकृत रूप से उनके परम मित्र एलन मस्क सहयोगी राष्ट्रपति की भूमिका निभाएंगे। जिसके बाद ये मुद्दा निशानेबाज के निशाने पर आ गया है।
- Written By: मृणाल पाठक
(डिजाइन फोटो)
नवभारत डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, अमेरिका के नए राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प 20 जनवरी को अपना पदभार ग्रहण कर लेंगे। ऐसा माना जाता है कि अनधिकृत रूप से उनके परम मित्र एलन मस्क सहयोगी राष्ट्रपति की भूमिका निभाएंगे। मस्क ने अभी से अपना प्रभाव जमाना शुरू कर दिया है।’’
हमने कहा, ‘‘पूंजीपतियों की यारी से जो शासन तंत्र चलता है उसे अंग्रेजी में क्रॉनी कैपिटलिज्म कहते हैं। मस्क दुनिया के सबसे धनवान व्यक्ति हैं। वह इतिहास के पहले ऐसे उद्योगपति हैं जिन्होंने 400 अरब डॉलर की दौलत जुटाई। जहां तक सोशल मीडिया में प्रभाव की बात है, ट्रम्प के 100 मिलियन फालोअर हैं तो मस्क के 200 मिलियन।’’
पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, धनवानों से मित्रता बहुत काम आती है। महाराणा प्रताप के लिए भामा शाह ने अपना खजाना खोल दिया था जिससे महाराणा ने नए सिरे से सेना जुटाकर 1576 में बादशाह अकबर से हल्दीघाटी की लड़ाई लड़ी थी। स्वाभिमानी महाराणा प्रताप ने कभी अकबर की अधीनता नहीं स्वीकारी।’’
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हमने कहा, ‘‘भारत की चुनावी राजनीति को भी अदाणी और अंबानी प्रभावित करते हैं। बीजेपी की सफलता के पीछे उनके मोटे चुनावी चंदे का योगदान है। कांग्रेस मानती है कि यह आदान-प्रदान वाला व्यवहार है। सरकार बदले में अदाणी को एयरपोर्ट, बंदरगाह और उद्योगों के लिए जमीन व अन्य सुविधाएं देती है। ट्रम्प की मस्क से निकटता भी सोच समझकर है। टेस्ला के मालिक मस्क ने कोई चुनाव नहीं लड़ा फिर भी अत्यंत प्रभावशाली हैं। उनकी सलाह, सुझावों और फैसलों को ट्रम्प जरूर मानेंगे। यदि ट्रम्प को हिंदी आती तो वह मस्क को देखकर खुशी से गाने लगते- यारी है ईमान मेरा, यार मेरी जिंदगी!’’
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पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, मस्क का मतलब कस्तूरी होता है। जिस हिरण की नाभि में कस्तूरी छिपी रहती है वह मस्क डीयर कहलाता है। केशर-कस्तूरी बहुत महंगी होती है। आप चाहें तो मस्क को कस्तूरचंद का हिंदी नाम दे सकते हैं। हो सकता है कि मस्क की सलाह लेकर ही ट्रम्प अपने सेक्रेटरीज (मंत्रियों) की नियुक्ति करें। अमेरिका में मस्क हैं तो भारत में भी खुशामदी लोग मस्का लगाकर अपना काम बनाने की फिराक में रहते हैं। ऐसा मानने में हर्ज नहीं है कि मस्क के हाथ में ट्रम्प कार्ड या तुरूप का पत्ता आ गया है।’’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
