नवभारत डिजाइन फोटो
Navabharat Nishanebaaz: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बारे में कहा कि उनकी पत्नी ब्रिजिट उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार करती हैं। मैक्रों अब भी अपने जबड़े पर पड़े थप्पड़ की चोट से उबरे नहीं हैं।’
हमने कहा, ‘ट्रंप को दूसरे के घर में ताकझांक नहीं करनी चाहिए, यह मैक्रों और उनकी बीवी का पर्सनल मामला है। वे प्यार करें या मारपीट, उनकी मर्जी। यह मामला मई 2025 का है जब मैक्रों वियतनाम यात्रा पर गए थे। विमान एयरपोर्ट पर उतरने के बाद उसका दरवाजा खुला तो लोगों ने देखा कि मैक्रों को उनकी पत्नी गाल पर झन्नाटेदार तमाचा मार रही हैं। इसे मैक्रों ने चुपचाप बर्दाश्त कर लिया।’
हमने कहा, ‘ऐसा लगता है कि मैक्रों महात्मा गांधी के अहिंसा के उपदेश से प्रभावित हैं। बापू ने कहा था कि यदि कोई तुम्हारे गाल पर एक तमाचा मारे तो विनम्रता से दूसरा गाल भी उसके सामने कर दो!’
पड़ोसी ने कहा, ‘आप गलत समझ रहे हैं निशानेबाज । पश्चिमी देशों में पत्नियां भी खूंखार हुआ करती हैं। वह पति से बराबरी से लड़ती हैं। फोर्क या किचन नाइफ का उपयोग करने या लात-घूंसा मारने में भी पीछे नहीं रहतीं। वहां मैरिज एक कांट्रैक्ट है, भारत के समान 7 जन्मों का अटूट बंधन नहीं। दूसरी बात यह कि मैक्रों की बीवी उनसे 25 साल बड़ी हैं। जिस तरह वह अपने पूर्व पति से हुए बच्चों को दबाकर रखती हैं वैसा ही बर्ताव मैक्रों के साथ भी करती हैं। इतने पर भी यह उनका व्यक्तिगत मामला है। चारदीवारी के भीतर हो या विमान के अंदर, मैक्रों कभी भी पिटाई के लिए तैयार रहते हैं। उनका रवैया है तू प्यार करे या ठुकराए, हम तो हैं तेरे दीवानों में। जैसे अपने देश में वाइफ बीटिंग या पत्नी की पिटाई की घटनाएं होती हैं वैसे ही पश्चिमी देशों में हस्बैंड बीटिंग या पति की ठुकाई हो जाती है। रोज मांसाहार करने और शराब पीनेवाली महिलाएं इतनी क्रूर हो जाती हैं। यदि डोनाल्ड ट्रंप को मैक्रों से इतनी ही स्पर्धा है तो वह भी अपनी पत्नी मेलानिया से कह सकते हैं कि प्लीज गिव मी ए टाइट स्लैप (मुझे एक जोर का थप्पड़ मारी)।’
यह भी पढ़ें:-सफलता, रिश्तों और बीमारी के बीच उलझी जिंदगी, जानें कैसे अकेलेपन में खत्म हुई परवीन बॉबी की दर्दभरी कहानी
हमने कहा, ‘ट्रंप इसलिए मैक्रों से खफा हैं क्योंकि फ्रांस ने ईरान पर हमले में उनका साथ नहीं दिया और अपनी नौसेना के जहाज भेजने से मना कर दिया। यूरोप के देशों का सहयोग न मिलने से ट्रंप की हालत खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे जैसी हो गई है।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा