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PVR Ad Time Waste: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, समय अत्यंत मूल्यवान है। टाइम इज मनी कहावत समय चूकी मुनि का पछतावे! समय चूक जाने के बाद पछताकर कोई फायदा नहीं। जिस व्यक्ति में हौसला व आत्मविश्वास होता है वह विपरीत स्थिति में भी कहता है अपना टाइम आएगा। अमेरिका में ‘टाइम’ मैगजीन निकलती है। न्यूयॉर्क और मुंबई के टाइम में साढ़े दस घंटे का अंतर है, परीक्षा से लेकर रेलवे तक टाइम टेबल रहता है। टाइम का पाबंद होना बहुत अच्छी बात है। आप भी टाइम मैनेजमेंट करके चला करो। दफ्तरों में टाइमकीपर रहा करता है। वह खुद समय पर आता है या नहीं, किसे पता। टेबल पर रखी जाने वाली घड़ी को टाइमपीस कहते हैं। हमने कहा, ‘इधर उधर की बातों में बहुमूल्य टाइम बर्बाद मत कीजिए। मुद्दे की बात साफ-साफ कहेंगे तो अच्छा रहेगा!’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, समय का महत्व समझते हुए बेंगलुरू के एक व्यक्ति ने पीवीआर आइनॉक्स पर लगातार 25 मिनट विज्ञापन दिखाकर उसका समय बर्बाद करने का दावा किया। वह फिल्म देखने गया था लेकिन शाम 4 बजे से 4:25 बजे तक विज्ञापन और ट्रेलर दिखाए जाते रहे। इसके बाद फिल्म शुरू की गई। उस व्यक्ति को 6:30 बजे काम पर लौटना था जिसमें वह लेट हो गया।’
हमने कहा, ‘यह कौन सी नई बात है। पीवीआर दर्शकों को इसकी आदत पड़ चुकी है। पॉपकानें खाते रहो और विज्ञापन देखते हुए पिक्चर शुरू होने का इंतजार करते रहो।’
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पड़ोसी ने कहा, ‘उस व्यक्ति ने पीवीआर पर दाबा दायर करते हुए कहा कि समय की इस बर्बादी से उसे असुविधा और मानसिक पीड़ा हुई। देर से काम पर पहुंचने से फटकार भी सुननी पड़ी। उसकी शिकायत सुनने के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने पीवीआर को आदेश दिया कि शिकायतकर्ता को 20,000 रुपये मुआवजा तथा शिकायत करने में आए खर्च के लिए 28,000 रुपये का अलग से भुगतान करे।’
हमने कहा, ‘पीवीआर की कमाई पॉपकॉर्न, समोसे, पानी की बोतल बेचने और ढेर सारे विज्ञापन दिखाने से होती है। यह पहला सजग दर्शक निकला जिसने समय की बर्बादी को मुद्दा बनाकर विज्ञापनों की भरमार के लिए पीवीआर को चुनौती दी। अधिकांश लोग उससे सहमत होंगे।”
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा