पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, बारिश का मौसम शुरू होने पर आम का सीजन ढलने लगता है. कुछ ही दिनों में बाजार से आम गायब हो जाएगा. इसलिए जल्दी-जल्दी अपने मनपसंद आम खा लीजिए.’’
हमने कहा, ‘‘पहली बात तो यह कि जब बाकी आम खत्म हो जाते हैं तो नीलम नामक छोटा आम मार्केट में आता है. आमतौर पर आम हमेशा भिन्न-भिन्न रूपों में मौजूद रहता है. आप मैंगो ज्यूस, आमपपड़ी, आम का अचार या मुरब्बा कभी भी खा सकते हैं. कच्चे आम को सुखाकर और पीसकर अमचुर पाउडर बनाया जाता है. राजनीति में नेता आम के आम और गुठलियों के दाम भी वसूल करते हैं. देश की आम जनता 10 माह बाद होनेवाले आम चुनाव में वोट डालने की तैयारी कर रही है.’’
पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, आम फलों का राजा कहलाता है. लोग देसी रसीला आम चूसते हैं तो बढ़ती महंगाई आम इंसानों का खून चूसती है. हमारे विविधतापूर्ण देश में आम भी कई प्रकार के होते हैं. गुजरात में केसर, महाराष्ट्र में अलफांसो और पायरी, कर्नाटक में बदामी, नीलम, रसपुरी, तोतापरी, तमिलनाडु में मलगोवा और इमामपसंद, आंध्रप्रदेश में बैंगनपल्ली व चिन्नारसाल, यूपी में लंगड़ा, दशहरी या मलीहाबादी और चौसा, बिहार में जर्दालु, बंगाल में हिमसागर, कोहिनूर, रानीपसंद, चंदनकोसा, लक्ष्मणभोग, असम में सेंदुरी, केटुरी, टेंगा, माटीमिठा जैसे आमों की पैदावार होती है.’’
हमने कहा, ‘‘आम आदमी की हैसियत इतनी नहीं होती कि वह बहुत महंगा आम खा सके. दुनिया का सबसे महंगा आम 3 लाख रुपए प्रति किलो का है. मियाजाकी नामक यह आम बंगाल में होता है. इस सीजन में अलफांसो के दाम भी 2,000 रुपए प्रति दर्जन चल रहे हैं.’’
पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, ग्रैंडट्रक रोड बनवाने वाले बिहार के शासक शेरशाह सूरी ने इस सड़क के दोनों ओर आम के वृक्ष लगवाए थे ताकि उसकी फौज दिल्ली की ओर कूच करते समय भरपूर आम खा सके. आम की इतनी महत्ता है कि बाबर और जहांगीर जैसे मुगल शासक भी आम के बेहद शौकीन रहे हैं. आम है तभी तो आम आदमी पार्टी है, जिसकी दिल्ली और पंजाब में सरकार है. उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा भी मिल चुका है. आम को लेकर शेर है- कब तक छुपेगी कैरी पत्तों की आड़ में!’’