केंद्र का स्पष्ट जवाब नहीं देश में लगातार टलती जा रही जनगणना, आखिर कब आएंगे सटीक आंकड़े
2025 में भी जनगणना होने के आसार दिखाई नहीं देते क्योंकि बजट में जनगणना कराने के लिए केवल 574 करोड़ 80 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है जबकि इसके लिए लगभग 12,000 करोड़ रुपए की आवश्यकता है।
- Written By: दीपिका पाल
भारत की जनगणना (सौ.डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: हर 10 वर्ष के अंतराल में होने वाली जनगणना कोरोना महामारी की वजह से 2021 में नहीं हो पाई. ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही थी कि लोकसभा चुनाव के बाद देश में जनगणना करा ली जाएगी लेकिन सरकार इसका नाम ही नहीं ले रही है। 2025 में भी जनगणना होने के आसार दिखाई नहीं देते क्योंकि बजट में जनगणना कराने के लिए केवल 574 करोड़ 80 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है जबकि इसके लिए लगभग 12,000 करोड़ रुपए की आवश्यकता है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना कराने के उद्देश्य से 2019 में 8,754 करोड़ रुपए खर्च को अनुमति दी थी लेकिन 2020 में कोरोना की वजह से सारा कामकाज ठप हो गया और गृह मंत्रालय ने जनगणना को टाल दिया। ऐसा अनुमान था कि कोरोना का संकट खत्म होने के बाद यह काम शुरू किया जाएगा, 2021-22 में जनगणना के लिए 3,768 करोड़ रुपए का प्रावधान भी किया गया लेकिन कुछ नहीं हुआ। संसद में प्रश्न पूछने पर कि जनगणना कब कराई जाएगी, उत्तर दिया जाता है- शीघ्र ही! इस शीघ्र का कभी मुहूर्त ही नहीं आता. गत वर्ष मूल बजट में जनगणना के लिए 1,309 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था लेकिन सुधारित बजट में यह रकम घटाकर 572 करोड़ रुपए कर दी गई।
अब 2025-26 के बजट में इसके लिए वित्तमंत्री ने 575 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है फिर भी इसके होने में शंका है क्योंकि अधिकांश रकम अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन-भत्ते पर खर्च हो जाएगी. कार्यालयीन कामकाज पर भी धन खर्च होगा। जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू करने पर भी सरकार पर बड़ा आर्थिक बोझ आएगा. जनगणना या जाति के अनुसार जनगणना में केंद्र सरकार की रुचि दिखाई नहीं देती. जातिनिहाय जनगणना की मांग का बीजेपी लगातार कड़ा विरोध कर रही है। जातिगत जनगणना के विरोध में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में प्रतिज्ञापत्र दाखिल किया है. बिहार सरकार ने जातिगत जनगणना का निर्णय लिया था, लेकिन केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राज्यों को ऐसा अधिकार नहीं है।
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देश में ओबीसी और पिछड़ा वर्ग जातिनिहाय जनगणना की मांग कर रहे हैं. बीजेपी नहीं चाहती कि कांग्रेस को इसका श्रेय मिले इसलिए वह जातिगत जनगणना को विभाजनकारी बता रही है. जदयू नेता व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीशकुमार ने बीजेपी से गठबंधन के पूर्व अपने राज्य में जातिनिहाय जनगणना कराई थी. उससे पता चला था कि बिहार की 65 प्रतिशत आबादी पिछड़े वर्ग की है. हाल ही में तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने जातिगत जनगणना का निष्कर्ष पेश करते हुए कहा कि राज्य की 56 फीसदी आबादी पिछड़े व कमजोर वर्ग की है. कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने भी जनगणना की लेकिन लिंगायत और वोक्कलिगा समुदाय के विरोध के कारण आंकड़े जारी नहीं किए. इसलिए कहा नहीं जा सकता कि केंद्र सरकार निकट भविष्य में देश में जनगणना कराएगी या नहीं?
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
