Navabharat Nishanebaaz: मंदिर में हुई चढ़ावे की चोरी, हो-हल्ला करे वो हिंदू विरोधी
Navabharat Nishanebaaz Ram Temple Donation: 'निशानेबाज' कॉलम में राम मंदिर चढ़ावा विवाद और उस पर स्वामी गोविंद देव गिरी तथा विपक्ष के बीच जारी बयानबाजी पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की गई है।
- Written By: अंकिता पटेल
(साेर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Navabharat Nishanebaaz Ram Temple Donation Row: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, स्वामी गोविंद देव गिरी ने विपक्षी पार्टियों के नेताओं में को निशाना बनाते हुए कहा कि राममंदिर चढ़ावा चोरी को आधार बनाकर संपूर्ण राष्ट्र में जो हो-हल्ला मचाया गया है, उसका इरादा साफ नहीं है। रामभक्ति का विरोध करने वाले लोगों ने दिखावे के लिए असाधारण काम किया है। ये वही लोग हैं जिन्होंने कारसेवकों पर लाठियां चलवाई थीं। इनका मुख्य हेतु हिंदू समाज को ध्यान में रखना चाहिए।’
हमने कहा, ‘चंपत राय को क्लीन चिट देने वाले स्वामी गोविंद देव गिरी पहले प्रवचनकार थे, तब उनका नाम किशोर व्यास था। वे कथावाचक से तरक्की कर धर्माचार्य बन गए।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, नदी का उदगम और साधु का अतीत नहीं पूछा करते। गोविंद देव ने उन विपक्षी नेताओं को आड़े हाथ लिया है, जिनका मंदिर निर्माण में दूर-दूर तक कोई योगदान नहीं है और जो मंदिर के उद्घाटन के समय वहां नहीं आए। जो लोग रामभक्त नहीं हैं, उन्हें राममंदिर की चंदा चोरी के बारे में पूछने और बवाल खड़ा करने का क्या अधिकार है? उनका निशाना चढ़ावा चोरी उजागर करने वाले सपा प्रमुख व यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव की ओर है। उनका आशय है कि अखिलेश व राहुल गांधी हिंदू विरोधी हैं तभी तो चंदा चोरी को लेकर हल्ला-गुल्ला मचा रहे हैं। कोई अपनी थाली में खाए या उसमें छेद करे, इन लोगों को क्या मतलब ! अच्छा-भला चंदा चोरी का धंधा चल रहा था, उसे ऐसे ही लगातार चलने देना था। इन्होंने रंग में भंग कर दिया। अब तो चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी ले लिया। इन आलोचकों के कलेजे में ठंडक पड़नी चाहिए। उन्हें शर्म आनी चाहिए कि व्यर्थ का हंगामा खड़ा कर दिया। यह पूरा मामला झूठ का प्रपंच है।’
सम्बंधित ख़बरें
कम विजिबिलिटी से बदला रूट, दिल्ली-भोपाल फ्लाइट नागपुर डायवर्ट, इंडिगो ने 25 मिनट लगाए चक्कर
महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल: क्या शरद पवार गुट NDA में होगा शामिल? जयंत पाटिल-तावड़े मुलाकात से अटकलें तेज
बारिश थमेगी तभी चलेगी रेल! नागपुर रूट पर बारिश का असर, गीतांजलि-दुरंतो समेत कई ट्रेनें घंटों लेट
महिलाएं आखिर सुरक्षित कहां? काशी-नागपुर ट्रेन में बदसलूकी से यात्रिय आक्रोशीत, सुरक्षा के दावों की खुली पोल
यह भी पढ़ें:-कम विजिबिलिटी से बदला रूट, दिल्ली-भोपाल फ्लाइट नागपुर डायवर्ट, इंडिगो ने 25 मिनट लगाए चक्कर
हमने कहा, ‘देशवासी तो यही मानते हैं कि चुनाव जीतने, विपक्षी पार्टियों को तोड़ने, नेताओं का दलबदल कराने के महान मिशन के लिए करोड़ों रुपये लगते हैं। मंदिर के चढ़ावे की रकम, सोना-चांदी सभी इसी काम के लिए जा रहे थे। अयोध्या तो सिर्फ झांकी थी, काशी-मथुरा बाकी है। विपक्ष के नेताओं को समझना चाहिए था कि रामजी की चिड़िया, रामजी का खेत, खाओ चिड़िया भर-भर पेट ! घी कहां गया एनडीए की खिचड़ी में।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
