निशानेबाज: सूखी सैलरी पर कौन जिए, इसलिए बढ़ाया जाता है डीए
Dearness Allowance: केंद्रीय कर्मचारी सीताराम का डीए 2 परसेंट बढ़ गया तो स्टेट गवर्नमेंट के कर्मचारी राधेश्याम का डीए भी उतना ही बढ़ा दिया जाता है।यह सामाजिक न्याय है जो बराबरी से किया जाता है।
- Written By: दीपिका पाल
सूखी सैलरी पर कौन जिए इसलिए बढ़ाया जाता है डीए (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, केंद्र सरकार के नक्शेकदम पर राज्य सरकार भी चलती है।यदि केंद्रीय कर्मचारी सीताराम का डीए 2 परसेंट बढ़ गया तो स्टेट गवर्नमेंट के कर्मचारी राधेश्याम का डीए भी उतना ही बढ़ा दिया जाता है।यह सामाजिक न्याय है जो बराबरी से किया जाता है।किसी को वंचित रखा जाए तो उसकी हाय लगेगी, इसलिए दिल्ली का दिल यदि अपने कर्मचारियों के लिए पिघलता है तो मुंबई का मन भी कहता है। कि तुरंत उतना महंगाई भत्ता अपने कर्मियों के लिए बढ़ा दो।सरकार की नीतियां व योजनाएं प्रशासन लागू करता है इसलिए उसे असंतुष्ट होने का मौका न दो।यह कभी मत कहो कि तिजोरी खाली है।’
हमने कहा, ‘सैलरी यदि मीठा केक है तो महंगाई भत्ता उस पर लगी आइसिंग।डियरनेस अलाउंस बढ़ने पर अफसर अपनी पत्नी को बताता है- माई डियर मेरा डीए बढ़ गया है।चलो पार्टी करते हैं.’ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, कभी-कभी डीए तथा अन्य भत्ते इतने बढ़ जाते हैं कि बेसिक वेतन पीछे छूट जाता है।पे स्लिप में हाउस रेंट अलाउंस, सिटी कंपेनसेटरी अलाउंस, ट्रैवलिंग अलाउंस, व्हीकल अलाउंस, स्पेशल पे, ओवर टाइम, नाइट अलाउंस, एंटरटेनमेंट अलाउंस का विवरण रहता है।कुछ सरकारी विभाग ऐसे हैं जहां वेतन-भत्ते के अलावा ऊपरी कमाई और कमीशनखोरी से भी कर्मचारी अपनी जेब भरते हैं।इससे कालेधन की समानांतर अर्थव्यवस्था चलती है।एक तरफ रहता है सैलरी का खाता और दूसरी ओर जनता पहचानती है कि किस डिपार्टमेंट में कौन जमकर पैसा खाता है और डकार तक नहीं लेता।’
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हमने कहा, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफीशिएंसी खोला।अपने यहां एफीशिएंसी की बजाय लालफीताशाही चलती है।डीए का कितना भी टॉनिक पिला दो, सरकारी मशीनरी कछुआ चाल से चलती है।वहां शायद ही कोई चपलता दिखाने वाला खरगोश नजर आएगा।कितना भी वैक्यूम क्लीनर चलाओ, सरकारी फाइलों पर जमी धूल की परत हटती नहीं ! सिस्टम में ईमानदार अधिकारी टिकता नहीं ! उसका जल्दी से ट्रांसफर कर दिया जाता है.।इतिहास में नादिरशाह, शेरशाह रहे हैं तो वर्तमान में नौकरशाह की हुकूमत चलती है।’
लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
