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नवभारत विशेष: 26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने खत्म की भूख हड़ताल, आंदोलन का क्या ?

Hunger Strike Ends: 26 दिन की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। वहीं, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रखने और पेपर लीक मामलों में जवाबदेही की मांग दोहराई गई।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Jul 25, 2026 | 08:13 AM

सोनम वांगचुक, भूख हड़ताल समाप्त (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)

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Sonam Wangchuk Hunger Strike: एक्स पर अपनी पोस्ट में वांगचुक, जो ‘सोनम सर’ के नाम से अधिक विख्यात हैं, ने कहा कि ‘विभिन्न शर्तों पर लम्बी वार्ता’ और साथ ही ‘देश में आशंकित हिंसा’ को रोकने के लिए वह अपनी भूख हड़ताल खत्म कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने कहा था कि वह 11 किलो वजन खोने के बाद ‘अब भी जिंदा’ हैं।

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक्स पर लिखा, ‘हम चिंतामुक्त और एहसानमंद हैं कि सोनम सर ने 26 दिनों के बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन उस समय तक जारी रहेगा, जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं हो जाता।’

अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह रहे हैं कि पेपर लीक केस फास्ट-ट्रैक अदालतों में चलाये जायेंगे। जब सही से जांच नहीं होगी तो फास्ट ट्रैक अदालतें ही क्या करेंगी? निरंतर पेपर लीकों की एक लम्बी सूची है, जिनमें कोई जवाबदेही स्थापित नहीं की गई है।

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व्यापम से NEET तक, जवाबदेही पर फिर सवाल

मध्य प्रदेश के 2013 व्यापम (व्यवसायिक परीक्षा मंडल) घोटाले में तो राजनेताओं, अधिकारियों और बिचौलियों ने रिश्वत लेकर मेडिकल व इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं तथा सरकारी नौकरियों में भारी धांधली की थी, योग्य छात्रों के स्थान पर डमी उम्मीदवार बैठाए और ओएमआर शीट में हेरफेर की।

हजारों करोड़ रुपये के इस घोटाले से जुड़े 30 से ज्यादा गवाहों, आरोपियों व संदिग्ध व्यक्तियों की रहस्यमय और अप्राकृतिक परिस्थितियों में मौतें भी हुई, जिससे देशभर में सनसनी फैली। लेकिन हुआ क्या? जांच और अदालती प्रक्रिया अभी भी जारी है। वांगचुक से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अस्पताल में मुलाकात की और चंद चीजों का आश्वासन दिया। मांगें मानने और आश्वासन देने में अंतर होता है।

अनशन खत्म, लेकिन छात्रों के सवाल बरकरार

सरकार ने आश्वासन दिया है कि जिन युवाओं व छात्रों ने संसद मार्च में हिस्सा लिया था या जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया उनके खिलाफ मामले दर्ज नहीं होंगे। लेकिन इस बारे में कोई बात सामने नहीं आई कि जिन पुलिसकर्मियों व सादे कपड़ों में रहस्यमय व्यक्तियों ने कील लगी लाठियां निहत्थे छात्रों पर बरसाई और छात्राओं के कपड़े फाड़े व उनके प्राइवेट पार्टस् पर लाठी मारी, जिससे 100 से अधिक छात्र अस्पताल पहुंचे तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी? प्रदर्शन स्थल पर पत्थरों से भरा ट्रक कौन और क्यों लाया था? छात्रों की जो मुख्य मांगें हैं उन पर सरकार ने न कोई वायदा किया है और न ही कोई आश्वासन दिया है। इसलिए यह प्रश्न प्रासंगिक है कि वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल क्यों समाप्त की।

वांगचुक ने अनशन तोड़ा, अब CJP आंदोलन पर नजर

वांगचुक शांतिप्रिय व्यक्ति हैं, उनको डर था कि कहीं पूरे देश में अशांति व हिंसा न फैल जाये। प्रधानमंत्री सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने उनसे अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने व अपनी सेहत को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था। वांगचुक को पहले भी एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) के तहत जेल भेजा जा चुका है।

हाल ही में जिलाधिकारी, लेह का एक पत्र भी वायरल किया गया, जिसमें कहा गया है-‘आप (वांगचुक) के चीन व अन्य जगहों पर राष्ट्रविरोधी संपर्क हैं। इसको वायरल करके वांगचुक पर पर्याप्त दबाव भी बनाया जा सकता था।

महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि अब सीजेपी आंदोलन का क्या होगा? अगर सीजेपी की वजह से वास्तविक बदलाव नहीं आता है तो भी उसने सख्त संदेश दे दिया है भारत में जेन जी की कुंठाओं का प्रबंधन करना सबसे कठिन राजनीतिक चुनौती होगी।

यह भी पढ़ें:-Navabharat Nishanebaaz: देवता ही नहीं, सरकार भी सो जाती है चातुर्मास में गहरी नींद आती है

प्रधान के इस्तीफे की मांग कायम

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने 23 जुलाई की देर रात 26 दिनों के बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। 59-वर्षीय वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की थी, जिसके युवा सदस्य केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं।

लेख- नौशाबा परवीन के द्वारा

Sonam wangchuk ends hunger strike jantar mantar paper leak protest

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Published On: Jul 25, 2026 | 08:13 AM

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