Navabharat Nishanebaaz: देवता ही नहीं, सरकार भी सो जाती है चातुर्मास में गहरी नींद आती है
Vishnu Yog Nidra: 'निशानेबाज' के व्यंग्य में देवशयनी एकादशी, भगवान विष्णु की योग निद्रा और शेषनाग से जुड़े धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से आस्था और जिज्ञासा को रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है।
- Written By: अंकिता पटेल
(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Devshayani Ekadashi Significance: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, आषाढ़ी या देवशयनी एकादशी से सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु अपनी शेषशय्या पर पूरे 4 माह के लिए गहन निद्रा में सो गए। जब देवता सो जाएं तो कोई मंगल कार्य नहीं हो सकता इसका मतलब यह कि शादी-ब्याह रुक जाएंगे। हमें समझ में नहीं आता कि ब्रम्हांड के नियंता ईश्वर कैसे सो सकते हैं?’
हमने कहा, ‘यह भगवान विष्णु की योग निद्रा है। इस समय वह ध्यानमग्न रहते हैं। घर में सर्प का अंदेशा होने पर लोगों की आंखों की नींद उड़ जाती है लेकिन भगवान शेषनाग की शय्या पर निश्चिंत सोए रहते हैं और लक्ष्मीजी उनके चरण दबाती है। शेषनाग विष्णु भगवान के साथ अवतार भी लेते हैं। कभी वे छोटे भाई लक्ष्मण के रूप में अवतरित होते हैं तो कभी बड़े भाई बलराम के रूप में!’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, जहां तक सोए रहने की बात है, विपक्ष मानता है कि सरकार भी सोई हुई है। इस नींद में गाफिल सरकार को महंगाई, बेरोजगारी, पेपर लीक, मंदिर का चढ़ावा चोरी, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, जंतरमंतर का प्रदर्शन, पुलिस का निर्मम अत्याचार, कुछ भी नजर नहीं आता। पीएम लंबे समय तक लगातार चुप्पी साधे रहते हैं। विपक्षी नेता प्रधानमंत्री निवास का घेराव करते हुए कहते हैं- जागो सोनेवालो, सुनो मेरी कहानी!’
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हमने कहा, ‘सोए हुए व्यक्ति को झकझोर कर या शोर मचाकर जगाया जा सकता है लेकिन जो जानबूझकर सोने का ढोंग कर रहा है, उसे कोई कैसे जगाए?’
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पड़ोसी ने कहा, ‘यदि किसी नेता का बेटा या बेटी जंतरमंतर पर पुलिस की लाठी खाता तो सरकार को होश आता। प्रधानमंत्री को शिक्षामंत्री प्रधान अत्यंत प्रिय हैं। जब धर्मेंद्र प्रधान पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री थे तब उन्होंने ओएनजीसी से करोड़ों रुपए संघ परिवार से जुड़ी संस्थाओं को दिलाए थे। वह बजरंग दल में भी प्रमुख हैसियत रखते थे। जिस तरह जनमेजय के नाग यज्ञ के समय परीक्षित को डसनेवाला तक्षक नाग खुद को बचाने के लिए इंद्र के सिंहासन से जाकर चिपक गया था, वैसे ही परीक्षा पेपर लीक के लिए जिम्मेदार शिक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री का संरक्षण या अभयदान ले रखा है। अब शुरू हो गया चातुर्मास जिसमें सरकार की निद्रा है खास !’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
