निशानेबाज: चुनाव आयोग का राहुल से क्वेश्चन, आरोप लगाकर करते पलायन

Navbharat Nishanebaaz: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी चुनाव आयोग और बीजेपी पर मिलीभगत से वोट चोरी करने का आरोप लगाते हैं। चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप का मिर्ची पाउडर छिड़कों।
चुनाव आयोग का राहुल से क्वेश्चन
चुनाव आयोग का राहुल से क्वेश्चन (सौ. डिजाइन फोटो)
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नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी चुनाव आयोग और बीजेपी पर मिलीभगत से वोट चोरी करने का आरोप लगाते हैं लेकिन जब चुनाव आयोग इस संबंध में शपथपत्र या एफेडेविट दाखिल करने की चुनौती देता है तो राहुल भाग जाते हैं। इस बारे में आप क्या कहेंगे?’ हमने कहा, ‘राहुल की यही शैली है। चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप का मिर्ची पाउडर छिड़को और वहां से चल दो। इधर चुनाव आयोग और बीजेपी नेता तिलमिलाते हैं और उधर राहुल जाकर लड्डू या जलेबी बनाते हैं।

मछुआरों के साथ तालाब में मछली पकड़ते हैं। उनके पास इतना फालतू वक्त नहीं है कि एफेडेविट दाखिल करें और फिर कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगाते रहें। राहुल को जनता की अदालत पर भरोसा है। वह अपने तरीके से चुनाव आयोग और बीजेपी पर सर्जिकल स्ट्राइक करते हैं। वह वोट चोरी को लेकर सीधे कहते हैं कि गोलमाल है, भाई सब गोलमाल है!’

पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, राहुल को ऐसा कौन सा काम है जो वह आरोप लगाने के बाद खिसक जाते हैं? पीएम मोदी को देखिए जिनके बारे में बीजेपी नेताओं का दावा है कि वह दिन-रात देश के लिए काम करते हैं। दूसरी ओर राहुल की ओर देखिए जिनका दिल दिल्ली में नहीं लगता। उनके दिल में लहर उठती है- भूल जा देश की हलचल, कहीं और चल! कभी-कभी तो संसद सत्र के समय ही वह विदेश निकल जाते हैं।’

हमने कहा, ‘राहुल अपना आध्यात्मिक दौरा निकालते हैं। कभी कंबोडिया जाते हैं तो कभी इंडोनेशिया। कहा जाता है कि राहुल विपश्यना करते हैं। ध्यान लगाने की इस विधि में एकांत कमरे में बैठकर मन को शांत करना और आत्मा की गहराइयों में उतरना पड़ता है। इस दौरान पत्र-पत्रिकाओं, मोबाइल, टीवी, लैपटॉप वगैरह से दूरी रखनी पड़ती है।’ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, राहुल चाहें तो इसी नेशन में रहकर मेडिटेशन के चाहे जितने सेशन कर सकते हैं। अपने बंगले में पूजाघर बनाएं और वहीं आंख मूंदकर ध्यान लगाएं। शायद उन्हें ध्यान में कांग्रेस के उद्धार का मार्ग मिल जाएगा। अपने घर-आंगन में ही साधना करें क्योंकि मन चंगा तो कटौती में गंगा!’

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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