नवभारत विशेष: दूसरे चरण की वोटिंग में सब कुछ दांव पर, 14 नवंबर को खुलेंगे किस्मत के सितारे
Bihar Assembly Election Second Phase: बिहार में ये पहले ऐसे विधानसभा चुनाव हैं, जिनको लेकर मतदाता बेहद खामोश हैं।यह खामोशी बेहद अप्रत्याशित है, इससे अगर 14 नवंबर को बेहद अप्रत्याशित नतीजे सामने आएं।
- Written By: दीपिका पाल
दूसरे चरण की वोटिंग में सब कुछ दांव पर (सौ. सोशल
नवभारत डिजिटल डेस्क: आज बिहार विधानसभा चुनाव-2025 के दूसरे और आखिर चरण की वोटिंग है।पहले चरण में 121 विधानसभा चुनावों के लिए मत पड़े थे और आज 122 विधानसभा सीटों के लिए मत पड़ेंगे।कुल 243 विधानसभा सीटों वाली बिहार असेंबली के लिए पहले चरण में जो बंपर वोटिंग हुई थी, उसको लेकर यूं तो पक्ष-विपक्ष दोनों के दावे यही हैं कि उनके पक्ष में ही भारी मतदान हुआ है।बिहार में ये पहले ऐसे विधानसभा चुनाव हैं, जिनको लेकर मतदाता बेहद खामोश हैं।यह खामोशी बेहद अप्रत्याशित है, इससे अगर 14 नवंबर को बेहद अप्रत्याशित नतीजे सामने आएं तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा।
जिस तरह पहले चरण के मतदान में 9 फीसदी ज्यादा वोटिंग हुई, उसे देखते हुए लग रहा है कि कुछ व्यापक और बेहद स्पष्ट समीकरण निर्मित हो रहा है।इन चुनावों का महत्व सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है बल्कि इनका व्यापक असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ना तय है।यही वजह है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही तरफ से अपनी सारी ताकत झोंक दी गई है।अगर बिहार में महागठबंधन जीतता है, तो न सिर्फ देश के अगले राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में उसके जीतने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव में भी वह सत्ता पक्ष के मुकाबले बड़ी चुनौती साबित होगा।
लेकिन अगर दूसरे चरण की वोटिंग में सत्ता पक्ष के खाते में जबर्दस्त वोटिंग होती है और तकनीकी रूप से 20 साल के बाद भी अपने मुख्यमंत्री पद की यात्रा जारी रखते हैं, तो यह न सिर्फ बिहार में एनडीए की जबर्दस्त ताकत का प्रदर्शन होगा बल्कि इन चुनावों के बाद मोदी सरकार की राजनीतिक हैसियत आज के मुकाबले कहीं ज्यादा बढ़ जाएगी।अगर नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन अंततः अपनी अनेक योजनाओं के बावजूद 20 साल की एंटी इनकमबेंसी के चलते विधानसभा चुनाव हार जाता है, तो राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेतृत्व वाले महागठबंधन को न सिर्फ बिहार में सत्ता हासिल होगी बल्कि वह अगले लोकसभा चुनावों के लिए कहीं ज्यादा प्रोत्साहित होगा।
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इसलिए बिहार विधानसभा के ये चुनाव सत्ता हो या विपक्ष दोनों की राजनीतिक ताकत का पैमाना है और इस पैमाने में खरे उतरने के लिए दोनों गठबंधनों ने अपनी-अपनी ताकत झोंक दी है।विशेष रूप से कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति में पुनर्वापसी, इन बिहार विधानसभा चुनावों के जरिए हो सकती है।अगर कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन करती है, तो माना जाएगा कि राहुल गांधी की आक्रामक राजनीति देश के मतदाताओं को पसंद आ रही है।
मतदाता एनडीए से असंतुष्टः
विपक्ष का सौ फीसदी दावा है कि बिहार के मतदाता मौजूदा सत्ता गठबंधन से बेहद असंतुष्ट हैं, क्योंकि जिस तरह से बिहार में गरीबी, बेरोजगारी चरम पर है।विपक्ष ने भले बहुत जोर शोर से बिहार में मतदाता सूची के संशोधन का मुद्दा उठाया हो, लेकिन इस समय जमीन में यह मुख्य मुद्दा नहीं है।अगर महागठबंधन अपने किसी चुनावी वायदे के कारण, सत्ता पक्ष के गठबंधन से आगे है, तो वह बिहार के हर परिवार को एक सरकारी रोजगार देने का वायदा है।
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बिहार विधानसभा चुनाव
तेजस्वी यादव ने कहा है कि अगर उनकी सरकार बनती है तो अगले साल जनवरी-फरवरी तक बिहार के मतदाताओं से किया गया हर परिवार को एक सरकारी नौकरी देने का वायदा पूरा हो जाएगा।जिस तरह से तेजस्वी यादव ने बिहार के हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का वायदा किया है और अगले तीन महीनों में ही बिहार की हर महिला के खाते में 30 हजार रुपये की रकम एकमुश्त डालने की घोषणा की है, उस घोषणा की कोई व्यवहारिक संभावना नजर नहीं आती।
लेख- नरेंद्र शर्मा के द्वारा
