Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी न्यूज़
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो

  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

विशेष- कृषि आय के लिए दुश्मन बनी ग्रामीण महंगाई, प्रॉफिट मार्जिन में आई मंदी

Rural inflation Rate- किसानों की आत्महत्याओं की वजह ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती महंगाई है। जिस हिसाब से कृषि लागत व परिवार श्रम में उन्हें वृद्धि करनी पड़ रही है उस हिसाब से आय में इजाफा नहीं हुआ।

  • By दीपिका पाल
Updated On: Aug 02, 2025 | 12:51 PM

कृषि आय के लिए दुश्मन बनी ग्रामीण महंगाई (सौ.डिजाइन फोटो)

Follow Us
Close
Follow Us:

 

नवभारत डिजिटल डेस्क: बेचारा किसान क्या करे? उसकी हालत ‘आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया’ जैसी होकर रह गई है।उसकी आय की तुलना में उसका खर्च बढ़ता जा रहा है।किसान ने तो अब उस चुनावी वायदे को याद करना भी बंद कर दिया है, जिसके तहत उसकी आय 2022 तक दोगुनी होनी थी।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत से जो व्यापार समझौता करना चाहते हैं, उसमें उनका दबाव है कि कृषि क्षेत्र उनके देश के लिए खोल दिया जाये।

दस प्रमुख फसलों की समीक्षा करने से मालूम होता है कि मक्का, मूंगफली व रेपसीड/सरसों को छोड़कर शेष सात फसलों- धान, सोयाबीन, कपास, अरहर /तूर और चना, गेहूं व गन्ना की कृषि आय वृद्धि ग्रामीण महंगाई दर से कम रही है।किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।एक तो उनकी आय में वृद्धि नहीं हो रही है और दूसरी यह कि खर्च इतना बढ़ गया है कि लाभ अंतर (प्रॉफिट मार्जिन) कम होता जा रहा है।यह बात कमीशन फॉर एग्रीकल्चरल कास्ट्स एंड प्राइसिज (सीएसीपी) द्वारा एकत्र डाटा की समीक्षा से सामने आई है।

वर्ष 2013-14 में धान के लिए निवेश लागत 25,179 रुपये प्रति हेक्टेयर थी, जबकि परिवार श्रम का मूल्य 8,452 रुपये प्रति हेक्टेयर लगाया गया, जोकि कुल 33,651 रुपये बैठा।फसल का मूल्य 53,242 रुपये प्रति हेक्टेयर था, जिसका अर्थ हुआ कि लाभ19,611 रुपये प्रति हेक्टेयर हुआ।वर्ष 2023-24 में धान के लिए निवेश लागत व परिवार श्रम 61,314 रुपये प्रति हेक्टेयर हो गया।फसल का मूल्य 91,530 रुपये प्रति हेक्टेयर मिला और इस लिहाज से आय 30,216 रुपये प्रति हेक्टेयर हुई।हालांकि आय में 54 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन 2013-14 और 2023-24 के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर में इजाफा 65 प्रतिशत का हुआ यानी जिस हिसाब से महंगाई बढ़ी उस हिसाब से आय नहीं बढ़ी।2013-14 में निवेश लागत व श्रम के हिसाब से प्रॉफिट मार्जिन 58 प्रतिशत था जो 2023-24 में गिरकर 49.3 प्रतिशत रह गया।

गेहूं में प्रॉफिट मार्जिन घटा

जहां धान खरीफ फसल है वहीं गेहूं मुख्यतः रबी फसल है।लेकिन एक दशक के दौरान इसकी तुलना धान से करने पर भी आय में वृद्धि व प्रॉफिट मार्जिन में सामान पैटर्न देखने को मिलता है।वर्ष 2012-13 में गेहूं के लिए निवेश लागत व परिवार श्रम का मूल्य 23,914 रुपये 53,356 रुपये प्रति हेक्टेयर था, जिसका अर्थ हुआ कि लाभ 29,442 रुपये प्रति हेक्टेयर हुआ।वर्ष 2022-23 में गेहूं के लिए निवेश लागत व परिवार श्रम 43,760 रुपये प्रति हेक्टेयर हो गया।फसल का मूल्य 88,939 रुपये प्रति हेक्टेयर मिला और इस लिहाज से आय 45,179 रुपये प्रति हेक्टेयर हुई।

हालांकि आय में 53 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन 2012-13 और 2022-23 के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर में इजाफा 71 प्रतिशत का हुआ यानी जिस हिसाब से महंगाई बढ़ी उस हिसाब से आय नहीं बढ़ी।इसके अतिरिक्त इस फसल ने भी प्रॉफिट मार्जिन में गिरावट दिखी।2012-13 में निवेश लागत व श्रम के हिसाब से प्रॉफिट मार्जिन 123 प्रतिशत था, जो 2022-23 में गिरकर 103 प्रतिशत रह गया।

किसान आत्महत्या की ज्वलंत समस्या

गन्ना व अन्य प्रमुख फसलों ने भी कुल आय में स्थिरता देखी।गन्ने से आय जो 2012-13 में 96,451 रुपये प्रति हेक्टेयर थी, वह 2022-23 में बढ़कर 1,21,668 रुपये प्रति हेक्टेयर तो अवश्य हुई, लेकिन यह 26 प्रतिशत की वृद्धि इस अवधि के दौरान बढ़ी ग्रामीण महंगाई (71 प्रतिशत) से बहुत कम है।उच्चतम आउटपुट के आधार पर जिन दस प्रमुख फसलों की तुलना की गई, उनमें केवल तीन ने ग्रामीण महंगाई में हुई वृद्धि के मुकाबले में दस वर्ष के दौरान अधिक आय अर्जित की।ये हैं मक्का (162 प्रतिशत) व मूंगफली (71.4 प्रतिशत) जब ग्रामीण महंगाई दर 65 प्रतिशत रही और रेपसीड व सरसों जब ग्रामीण महंगाई दर 71 प्रतिशत रही।

ये भी पढ़ें–  नवभारत विशेष के लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें

शेष सात फसलों के लिए आय में वृद्धि ग्रामीण महंगाई दर से कम रही।किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं की वजह यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में निरंतर बढ़ती महंगाई के कारण जिस हिसाब से कृषि लागत व परिवार श्रम में उन्हें वृद्धि करनी पड़ रही है उस हिसाब से उनकी आय में इजाफा नहीं हो रहा है और उनका प्रॉफिट मार्जिन भी निरंतर कम होता जा रहा है।इस समस्या का हल तभी निकल सकता है जब राजनीतिक दल संसद में इस विषय पर गहन चर्चा करें.

लेख- नरेंद्र शर्मा के द्वारा

Rural inflation has become an enemy of agricultural income

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Aug 02, 2025 | 12:51 PM

Topics:  

  • Farmer Organization
  • Farmers Loan Waiver
  • Farmers Protest

सम्बंधित ख़बरें

1

23 दिसंबर का इतिहास: आज का दिन राष्ट्रीय किसान दिवस के नाम, जानिए और महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में

2

UP में बड़े किसान आंदोलन की तैयारी…राकेश टिकैत ने सरकार को दिया अल्टीमेटम, जानिए क्या हैं मांगें?

3

गोसेखुर्द के पानी के लिए अनशन: दो महिलाओं की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

4

संपादकीय: अवैध साहूकारों की दरिंदगी कब तक?

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.