

Repo Rate Loan EMI: भारत में होम लोन, वाहन लोन और कई तरह के दूसरे लोन की ब्याज दरें सीधे रेपो रेट से तय होती हैं। अगर रेपो रेट में बढ़ोतरी होती है, तो बैंक सीधे-सीधे आम लोगों को दिए गए लोन की ब्याज दरों को बढ़ा देते हैं, जिससे आम मध्यवर्गीय घरों का बजट और तनावपूर्ण हो जाता है। देश में करीब 13 करोड़ लोग अलग-अलग जरूरतों के लिए लिया गया कर्ज चुकाने हर महीने ईएमआई चुकाते हैं। अगर आरबीआई रेपो रेट बढ़ाएगी, तो इसका असर इन परिवारों के ऊपर पड़ेगा।
रेपो रेट बढ़ाए जाने की आशंका इसलिए प्रबल हो रही है, क्योंकि इस साल जुलाई महीने में महंगाई दर (सीपीआई) जहां 4,45 फीसदी थी, वह अगस्त में बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई और आरबीआई का महंगाई दर को 4 फीसदी में रोककर रखने का लक्ष्य है। संपूर्णता में महंगाई दर इस समय 4.82 फीसदी से ऊपर है, वहीं खाद्य महंगाई दर 5.95 फीसदी से भी ज्यादा है, जबकि यह जुलाई में 5.52 प्रतिशत थी।
अगर इसे भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में अलग-अलग देखें तो इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई दर 6.13 फीसदी है। महंगाई दर के साथ-साथ ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। जानकारों का अनुमान है कि अक्टूबर माह से शुरू त्योहारी मौसम में आम लोगों पर महंगाई की छाया मंडरा रही है।
क्योंकि रिजर्व बैंक के सामने न सिर्फ व्याज दरों को बढ़ने से रोकने की चुनौती है, बल्कि महंगाई को काबू में रखने और आर्थिक विकास गति को बनाए रखने का भी कठिन लक्ष्य है। इसलिए केंद्रीय बैंक के सामने महंगाई, ब्याज दरों और रुपये को डॉलर के मुकाबले स्थिर बनाए रखने की कड़ी चुनौती है।
उपभोक्ता, मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई का मध्यम अवधि का लक्ष्य 4 प्रतिशत है और सामान्य परिस्थितियों में इसे 2 से 6 फीसदी के दायरे में रखने की कोशिश की जाती है, ताकि मूल्यों में स्थिरता बनी रहे। पिछले 3 महीनों में महंगाई दर काफी बढ़ चुकी है, इसलिए आरबीआई पर अब इसे काबू करने का दबाव है।
2023-24 में यह जहां 5.4 फीसदी थी, वहीं 2022-23 में 6.7 फीसदी तक रही है। ऐसे में अगर आरबीआई यह तय करे कि अगले 3 महीने और देख लेते हैं, तो लगभग 13 करोड़ ईएमआई भरने वालों को इस त्योहारी सीजन में बढ़ने वाली ब्याज दरों से राहत मिल सकती है।
आरबीआई का यह साहसी फैसला दिवाली की खरीदारी को भी पंख लगा सकता है। क्योंकि भारत में दिवाली के मौके पर पूरे सालभर में होने वाली खरीदारी का लगभग 30 से 35 फीसदी हो जाता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को काफी मजबूत प्रोत्साहन मिलता है। अक्टूबर माह में ही यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) शुरू होना है, जिसके बारे में सरकार कह रही है कि उपभोक्ताओं पर इसका भार नहीं डाला जाएगा।
लेकिन हम सब जानते हैं कि दुकानदार कभी भी अपनी जेब से कोई अधिभार भला क्यों चुकाएगा? उसकी कीमत भी वह उपभोक्ता से ही वसूलेगा। इसलिए एक तरफ एमडीआर के चलते ऑनलाइन खरीदारी के महंगे होने की बात है, वहीं अगर रिजर्व बैंक ने रेपो रेट बढ़ाया तो उसका असर सिर्फ मासिक किस्तों या लिए गए कर्ज के ब्याज पर ही नहीं पड़ेगा, उसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में भी साफ तौर पर दिखाई देगा।
यह असर दीपावली की खरीदारी को प्रभावित कर सकता है। इसलिए जानकारों का साफ मानना है कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की आगामी बैठक बहुत महत्वपूर्ण है। रुपये की डॉलर के विरुद्ध गिरती कीमत भी असर डाल सकती है। क्योंकि रुपये की विनिमय दर भी अप्रत्यक्ष रूप से ही सही, लेकिन देश के उपभोक्ताओं की खरीदारी पर असर डालती है। यदि अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहती हैं और भारत का अमेरिका के बीच ब्याज दर का अंतर घटता है, तो कुछ विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय परिसंपत्तियों का आकर्षण प्रभावित हो सकता है।
लेख-लोकमित्र गौतम के द्वारा