Navabharat Nishanebaaz: BJP की रणनीति का असर, विपक्षी पार्टियों पर टूटा कहर
India Party Politics: चुनावी जीत की पार्टियों से शुरू हुई चर्चा भारत की राजनीतिक पार्टियों तक पहुंच गई। व्यंग्यात्मक अंदाज में देश की बदलती राजनीति और विपक्ष की स्थिति पर कटाक्ष किया गया।
- Written By: अंकिता पटेल
नवभारत डिजाइन फोटो
BJP Opposition Party Crisis: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, चुनाव जीतने वाले नेता पार्टियां दे रहे हैं। वही पाटर्टी सफल मानी जाती है, जो देर रात तक चलती है। लोग खाते-पीते और तेज म्यूजिक पर डान्स करते हैं। आपने गीत सुना होगा- ‘4 बज गए हैं, लेकिन पार्टी अभी बाकी है।’ पार्टी से टुन्न होकर निकलने वालों की ताक में पुलिस तैनात रहती है ताकि ड्रंक एंड ड्राइव के तहत उस पर कार्रवाई की जा सके। इसलिए रात की गीली पार्टी में अपने साथ ऐसे व्यक्ति को ले जाना चाहिए जो टी-टोटलर हो अर्थात नशा-पानी न करता हो। गाड़ी उसे ही चलाने देनी चाहिए, एक कहावत है पार्टी बेवकूफ लोग देते हैं और समझदार लोग उसका आनंद उठाते हैं। आम तौर पर परीक्षा में पास होने, नौकरी लगने, प्रमोशन होने पर पार्टी दी जाती है। आपका पार्टी के बारे में क्या विचार है?’
हमने कहा, ‘अपनी निगाह होटल, रेस्टोरेंट, क्लब या लॉन में दी जाने वाली पार्टी तक सीमित मत रखिए। हमारा भारत पार्टियों की तादाद के मामले में भी महान है। देश में 2,585 रजिस्टर्ड पार्टियां हैं, जिनमें से 8 राष्ट्रीय स्तर की पार्टियां हैं जिनकी अनेक राज्यों में मौजूदगी है। 54 राज्यस्तरीय क्षेत्रीय पार्टियां हैं। बाकी पार्टियों में कोई दम नहीं है।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, इस समय तो बीजेपी विपक्षी पार्टियों का दम निकाल रही है। आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सदस्य फोड़कर केजरीवाल की झाडू के तिनके बिखेर दिए।
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पिछले चुनाव में ममता का पैर टूटा था। इस बार उनकी पार्टी का टिनपाट बजा दिया। विपक्ष मुक्त भारत की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। तमिलनाडु में युवा पीढ़ी रामास्वामी पेरियार की द्रविड़ विरासत को भूल गई।
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एमजीआर और जयललिता की रोमांटिक मूवी भी उसने नहीं देखी। उसे करुणानिधि की करुणा याद नहीं आई। रूस का तानाशाह जोसेफ स्टालिन और तमिलनाडु का हिंदी विरोधी स्टालिन भी इतिहास में चले गए। अब विजय की पार्टी ही विजय का जश्न मनाएगी।”
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
