

पीएम मोदी के ‘वी विल डू इट’ के संकल्प पर व्यंग्यात्मक अंदाज में चर्चा।
विकसित भारत, दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्था और मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के लक्ष्य का जिक्र।
ओलंपिक की मेजबानी और अंतरिक्ष में भारत की उपलब्धियों को लेकर सरकार के एजेंडे पर कटाक्ष।
Narendra Modi Vision for India: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, प्रधानमंत्री मोदी का मजबूत विल पॉवर इस बात से प्रकट होता है कि उन्होंने हर बात में पूरे जोश और आत्मविश्वास के साथ कहा- विकसित भारत वी विल डू इट, टॉप श्री इकोनॉमी वी विल डू इट, मैन्युफैक्चरिंग हब वी विल डू इट, ओलंपिक मेजबानी वी विल डू इट, अंतरिक्ष में कदम वी विल डू इट! हमें बताइए कि पीएम के इस व्यापक और विस्तृत एजेंडा के बारे में आपकी क्या राय है? कहा गया है- एक ही साधे, सब सधे, सब साधे सब जाए! किसी व्यक्ति को एक ही काम पूरी कुशलता से मन लगाकर करना चाहिए। एकसाथ दस काम करने लगेंगे तो कोई भी ढंग से पूरा नहीं हो पाएगा।'
हमने कहा, 'आपको समझना चाहिए कि मोदी मल्टीटास्किंग क्षमता रखते हैं। वह एकसाथ सिर्फ 10 नहीं, 100 काम कर सकते हैं। इसीलिए उन्होंने अपनी हर घोषणा में विल का उपयोग किया, शैल का नहीं!'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, हमने पीसी रेन और मार्टिन का अंग्रेजी ग्रामर पढ़ा था फिर भी आप बताइए कि शैल और विल में कौन सा खास अंतर होता है? दूरदर्शन के जमाने में एक गीत भी चल पड़ा था- वी शैल ओवरकम सम डे! गिरिजाकुमार माथुर ने इसका हिंदी अनुवाद किया था- होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब एक दिन, मन में है विश्वास पूरा है विश्वास, हम होंगे कामयाब एक दिन!'
हमने कहा, 'शैल कहने में अनिश्चितता है जबकि विल कहने में पक्का इरादा और भरोसा। इसलिए मोदी ने जानबूझकर 'विल' शब्द का उपयोग किया। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत बनाने की योजना बनाई है। यदि वह अत्यंत दीर्घजीवी रहे तो उस समय 97 वर्ष के हो जाएंगे जितनी अभी आडवाणी की उम्र है। मोदी के पास बीजेपी को सत्ता में निरंतर बनाए रखने का विशेष मंत्र-तंत्र है।
भगवान राम ने त्रेता युग में 11,000 वर्ष अयोध्या में राज किया था। मोदी तो सिर्फ अगले 21 साल का सपना देख रहे हैं। भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोरबे ने सत्ता में मोदी के 25 वर्ष पूरे होने पर 'एन अवतार फॉर अवर टाइम्स' शीर्षक लेख लिखा है जिसमें उन्होंने मोदी को भगवान विष्णु का अवतार बताया और कहा कि उनमें 3 गुण हैं- बुद्धि, करुणा और साहस !'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा