संपादकीय: आखिर जनगणना को हरी झंडी, स्वगणना का प्रावधान काफी चुनौतीपूर्ण होगा
हमारे विशाल आबादी के देश में पहली बार डिजिटल जनगणना कराने की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, तब से आबादी काफी बढ़ गई है। इस बार जातिगत गणना के साथ ही स्वगणना का भी प्रावधान रखा गया है।
- Written By: दीपिका पाल
डिजिटल जनगणना (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: विलंब से ही सही, हमारे विशाल आबादी के देश में पहली बार डिजिटल जनगणना कराने की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, तब से आबादी काफी बढ़ गई है। इस बार जातिगत गणना के साथ ही स्वगणना का भी प्रावधान रखा गया है जिसमें लोग सरकारी पोर्टल में लॉग-इन कर पारिवारिक विवरण देंगे। इसके बाद एक आईडी बनेगी जिससे जनगणना कर्मी सूचना की पुष्टि करेंगे। स्वगणना मेट्रो शहरों में होगी लेकिन वहां भी जो लोग डिजिटली साक्षर नहीं हैं, वह कैसे जानकारी दे पाएंगे? लोग तो कागजी फार्म भी ठीक से नहीं भर पाते। यह कैसे पता चलेगा कि प्रत्येक घर जनगणना में शामिल हुआ।
इसीलिए प्रशिक्षित जनगणना कर्मियों की आवश्यकता पड़ रही है। देश के 33 करोड़ मकानों में लगभग 136 करोड़ लोगों की गणना होगी जिसे 34 लाख गणक व सुपरवाइजर अंजाम देंगे। 1।3 लाख जनगणना पदाधिकारी जिम्मेदारी संभालेंगे। जनगणना नियमों 1990 में संशोधनों की अधिसूचना 11 मार्च 2022 को जारी की गई थी। संशोधन में कहा गया था कि जानकारी दस्तावेजी या इलेक्ट्रानिक रूप में जमा की जाएगी इसमें स्वगणना भी शामिल होगी। स्वगणना या सेल्फ एन्युमरेशन का अर्थ लोग स्वयं जनगणना प्रश्नावली भरेंगे और प्रेषित करेंगे। हर कोई तो ऐसा कर नहीं पाएगा इसलिए जनगणना ‘हायब्रिड मोड’ में होगी।
जनगणना में लोगों से 36 प्रश्न पूछे जाएंगे जैसे कि क्या वे मोबाइल फोन या इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं? इनके पास कौन से वाहन हैं? वह कौन-कौन सा अनाज खाते है? उन्हें पीने का पानी कहां से मिलता है? उनका घर किस प्रकार का है? परिवार का मुखिया पुरुष है या महिला? क्या वह अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से है? वे किस जाति या समुदाय से ताल्लुक रखते हैं? जनगणना के प्रथम चरण में प्रत्येक घर की स्थिति, संपत्ति व सुविधाओं का विवरण एकत्र किया जाएगा जबकि इसके दूसरे चरण में जनसंख्या गणना, जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, सांस्कृतिक स्थिति के अलावा प्रत्येक घर में हर व्यक्ति का विवरण एकत्र किया जाएगा। प्रथम चरण का आवास सूचीकरण अप्रैल 2026 से शुरू हो सकता है। जनगणना कर्मियों और पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण इस वर्ष अक्टूबर माह से शुरू होगा।
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2011 में की गई पिछली जनगणना पर लगभग 3300 करोड़ रुपए खर्च आया था। इस बार की जनगणना पर 13,000 करोड़ रुपए खर्च आने का अनुमान है। इसमें सुनिश्चित करना होगा कि देश के कितने भी दुर्गम इलाके में कोई घर हो तो वह नहीं छूटेगा? क्या नक्सलग्रस्त व सीमा से लगे इलाकों में यह संभव हो पाएगा। जनगणना की समूची प्रक्रिया अत्यंत ईमानदारी व जिम्मेदारी के साथ पूरी करनी होगी। 1 मार्च 2027 को जनगणना की ‘रिफरेंस डेट’ तय किया गया है। इसका अर्थ यह कि इस तारीख के बाद जन्म लेनेवाला बच्चा जनगणना में शामिल नहीं होगा। जनगणना पूरी होने के बाद चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन की दिशा में सरकार आगे बढ़ सकती है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
