Navbharat Nishanebaaz: रेवंत रेड्डी का तरीका है न्यारा, भगवान का किया बंटवारा

Revanth Reddy Statement: तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के राम और शिव को लेकर दिए बयान पर व्यंग्य किया गया है। लेख में दोनों देवताओं को गरीब-अमीर के भेद से परे मान्यताओं का उल्लेख किया गया है।
Ram Shiva Religious Debate
निशानेबाजफोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
Published on: 
Updated on: 

Ram Shiva Religious Debate: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की बुद्धि तेल लेने चली गई। उन्होंने विचित्र बात कही कि शिव गरीबों के और राम अमीरों के भगवान हैं। उनकी इस थ्योरी पर आपकी क्या राय है?'

हमने कहा, 'नेता चालाक होते हैं लेकिन अध्ययनशील और ज्ञानी नहीं होते। बेतुकी बातें करने में कोई उनका हाथ नहीं पकड़ सकता।' भगवान सभी के हैं। वह अमीर-गरीब, छोटा-बड़ा, ऊंच-नीच में कोई भेद नहीं करते। राम और शिव के बीच भूलकर भी भेद नहीं करना चाहिए। दोनों एक-दूसरे के पूज्य या आराध्य हैं। शिव रामकथा सुनने के लिए कुंभज ऋषि (अगस्त्य) के पास गए थे। रामरक्षा स्तोत्र के अंत में शिव ने पार्वती से कहा- 'राम रामेति-रामेति रमे रामे मनोरमे, विष्णु नाम सहस्त्रतुल्यं राम नामे वरानने!' अर्थात राम नाम विष्णु भगवान के 1 हजार नामों के बराबर है और मैं सदा राम नाम में ही रमण करता हूं। इसी तरह राम भी सबसे बड़े शिवभक्त हैं। उन्होंने रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना की थी।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, रेवंत रेड्डी को शायद यह भी पता नहीं होगा कि हनुमान एकादश रुद्र या ग्यारहवें रुद्र कहलाते हैं। भगवान राम की मदद के लिए शिव वानर रूप लेकर हनुमान बने थे। जब राम का अयोध्या में जन्म हुआ तो उनके दर्शन के लिए शिव कैलाश पर्वत से वहां आए थे। जब राम ने रावण को मारकर संसार का संकट दूर किया, तब भी शिव ने प्रकट होकर राम की स्तुति की थी। वाल्मिकी रामायण या संत तुलसीदास का रामचरित मानस पढ़ें तो यह जानकारी मिल जाएगी। वैसे आप हमें यह बताइए कि भगवान को लेकर अमीर-गरीब भक्तों का मुद्दा कहां से आ गया?'

Ram Shiva Religious Debate
नासिक में बनेगा विश्वस्तरीय भव्य रामायण थीम पार्क, पीपीपी मॉडल पर होगा निर्माण

हमने कहा, 'रेवंत रेड्डी को मालूम होना चाहिए कि राम ने भीलनी शबरी के झूठे बेर खाए। गंगा पार कराने वाले निषाद को भरत के समान भाई कहकर गले लगाया। वन में रहने वाले वानरों की सेना बनाई और तीनों लोकों के विजेता रावण को हराया। शिला बन चुकी उपेक्षित नारी अहल्या का उद्धार किया। अयोध्या का वैभवपूर्ण राज सिंहासन त्याग कर वल्कल वस्त्र पहनकर नंगे पैर 14 वर्ष तक वनवास में रहने वाले राम सिर्फ अमीरों के भगवान कैसे हो सकते हैं? विवेकी भक्तों ने राम और शिव में कोई भेद न करते हुए समन्वय रखा इसीलिए शिवनारायण, शिवराम, शिवकिसन, रामशंकर, शंकरनारायण जैसे नामों का प्रचलन रहा है। रेवंत रेड्डी को समझना चाहिए कि 'निर्बल के बल' राम ही होते हैं।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com