

Digvijaya Singh Sanatan Swabhiman Yatra : मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर सवाल उठाते हुए 20 अक्टूबर से ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने का ऐलान किया है। विजयादशमी के दिन शुरू होने वाली यह यात्रा उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर अयोध्या पहुंचेगी। सिंह ने इसे धर्म और आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की मांग तथा कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ जन-जागरण से जोड़ा है।
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई गई नकदी, विदेशी मुद्रा और सोने-चांदी के आभूषणों के प्रबंधन में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है। उन्होंने दावा किया कि जांच में कुछ आरोपियों ने करोड़ों रुपये की चोरी की बात स्वीकार की है। सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि CCTV फुटेज हटाकर मामले से जुड़े साक्ष्यों को दबाने का प्रयास किया गया।
दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि सामने आई चोरी की रकम से कहीं अधिक राशि की हेराफेरी हो सकती है। उन्होंने 200 से 300 करोड़ रुपये तक की कथित गड़बड़ी की आशंका जताई। हालांकि, यह आंकड़ा उनके द्वारा लगाया गया अनुमान है। दूसरी ओर, उपलब्ध जांच रिपोर्टों में राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी 105 कथित चोरी की घटनाओं का उल्लेख किया गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राम मंदिर निर्माण की लागत को लेकर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, शुरुआत में निर्माण की अनुमानित लागत करीब 800 करोड़ रुपये बताई गई थी, जबकि बाद में यह खर्च करीब 2200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। उन्होंने श्रद्धालुओं से मिले दान की राशि और निर्माण लागत के बीच के अंतर को लेकर पारदर्शिता की मांग की।
दिग्विजय सिंह ने मंदिर निर्माण से जुड़े ठेकों में 40 प्रतिशत कमीशन लिए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि दान में प्राप्त राशि से कर्नाटक में जमीन खरीदी गई। इसके अलावा उन्होंने 1989 के रामशिला पूजन अभियान के दौरान जुटाए गए धन और चांदी की ईंटों का हिसाब सार्वजनिक किए जाने की मांग की।
सिंह ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा से जुड़े कुछ काम ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को दिए गए और काम पूरा होने से पहले ही करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। उन्होंने दावा किया कि इन गड़बड़ियों का उल्लेख स्थानीय ऑडिट रिपोर्ट में भी सामने आया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि का दावा उन्होंने अपनी बात के समर्थन में किया है, जबकि संबंधित पक्षों का जवाब इस इनपुट में शामिल नहीं है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे RSS या VHP की विचारधारा से सहमत नहीं हैं, लेकिन राम मंदिर निर्माण के पक्ष में रहे हैं और उन्होंने भी अपनी श्रद्धानुसार दान दिया है। उनका कहना है कि जब उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए दान दिया है तो उसके इस्तेमाल का हिसाब पूछना उनका लोकतांत्रिक और धार्मिक अधिकार है। उन्होंने यात्रा में धर्म और आस्था से जुड़े मूल्यों की रक्षा के लिए विभिन्न वर्गों के लोगों से शामिल होने की अपील की है।
‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ 20 अक्टूबर को उज्जैन से शुरू होगी और अयोध्या में भगवान श्रीराम के दर्शन के साथ समाप्त होगी। दिग्विजय सिंह ने यात्रा को गैर-राजनीतिक बताते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य धर्म और आस्था के नाम पर कथित भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं के खिलाफ जन-जागरण करना है।