नवभारत विशेष: नीट नौटंकी : सरकार जिम्मेदार, छात्रों से खिलवाड़, NTA की जबरदस्त विफलता
NEET UG Scam: नीट-यूजी परीक्षा को लेकर अनियमितताओं, पेपर लीक और प्रशासनिक खामियों के आरोपों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 2024 में कई केंद्रों पर गड़बड़ियों की जांच और विवाद सामने आए।
- Written By: अंकिता पटेल
नीट यूजी,(सोर्स: सोशल मीडिया)
NTA Exam Irregularities Case: 2019 में एनटीए द्वारा प्रतियोगी परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी लेने के बाद से यह पहला अवसर है, जब नीट-यूजी को पूर्णतः रद्द करना पड़ा है। 2024 में जब अंकों में अनियमितता का मामला प्रकाश में आया था तो 1,563 से थोड़े अधिक छात्रों के लिए आंशिक रूप से परीक्षा पुनः आयोजित की गई थी। नीट का रद्द किया जाना, एनटीए की बड़ी संस्थागत नाकामी है, जो छात्रों के लिए त्रासदी बन जाती है। 2024 में पेपर लीक होने के आरोप सबसे पहले पटना में लगे, जहां यह बात प्रकाश में आई कि प्रश्नों को एडवांस में जानने के लिए कुछ छात्रों ने 30 लाख रुपए व 50 लाख रूपए के बीच रकम दी थी।
फिर गोधरा में एक अध्यापक पर आरोप लगे कि उसने मोटी रकम लेकर छात्रों की ओएमआर शीट भरने में मदद की। सवाई माधोपुर, राजस्थान के एक केंद्र में ‘गलत प्रश्न पत्र वितरित किए गए। इनके अतिरिक्त 2024 के नतीजों में अनियमितताएं भी प्रकाश में आई थीं। अप्रत्याशित रूप से 67 छात्रों का स्कोर परफेक्ट रहा (720/720), जिसे बाद में घटाकर 17 कर दिया गया। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने फिजिक्स के विवादित प्रश्न के अंकों को रद्द कर दिया जो कि पुरानी पाठ्यपुस्तक की गलती पर आधारित था।
छात्रों को ‘गणितीय दृष्टि से असंभव’ अंक 718 व 719 भी दिए गाए थे ‘क्षतिपूरक भरपाई अंक के रूप में, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। इस साल का विवाद यह है कि राजस्थान में एक गेस पेपर सर्कुलेट हो रहा था, जिसमें लगभग 600 अंक मूल्य के प्रश्न वही थे, जो कि वास्तविक पेपर के 720 अंकों से मेल खाते थे। इसकी वजह से ही पेपर को रद्द करना पड़ा।
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जांचकर्ताओं ने लीक को जयपुर की प्रिंटिंग एजेंसी और महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, बिहार व केरलम में फैले कोचिंग नेटवर्क्स से लिंक किया है। नासिक पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है। शिक्षा मंत्रालय की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने के बाद सीबीआई ने देश में 12 जगहों पर छापे मारे हैं।
एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह का दावा है कि 3 मई 2026 को जो परीक्षा हुई थी, उसके पेपर के चार कोड वर्जन थे, जिनमें से एक भी बाजार में नहीं पाया गया है और इसलिए ‘कोई लीक स्थापित नहीं हुई है। वह यह भी कहते हैं कि ‘पूरा पेपर लोक नहीं हुआ है’, अजीब विरोधाभास है। ‘लीक स्थापित नहीं हुई’ और ‘पूरा पेपर लोक नहीं हुआ’, तो फिर परीक्षा रद्द क्यों की गई? 720 अंकों में से अगर 600 अंकों के प्रश्न मेल खा जाए तो यह घोटाला व बड़ी साजिश है और इसके अतिरिक्त कुछ नहीं।
नीट विवाद पर NTA की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल
समय व एक्सेस के आधार पर लीक पेपर 25,000 से 40 लाख रुपए तक का बेचा गया, यह प्रशासनिक नाकामी है और छात्रों के प्रति असंवेदनशीलता, दरअसल, सरकार व एनटीए अपनी नाकामी को छुपाने का प्रयास कर रहे हैं, छात्र व पैरेंट्स विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। नीट को आयोजित करने में लगभग 200 करोड़ रुपए का खर्च आता है, लेकिन एनटीए छात्रों की एप्लीकेशन फीस से लगभग 300 करोड़ रुपए कमाती है।
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एनटीए की स्थापना 2017 में एक केंद्रीय नोडल संस्था के रूप में हुई थी जो सभी कॉलेज व प्रोफेशनल प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन करें। लेकिन इस अवधि में देखने को मिले हैं प्रश्न पत्र लीक, नकल, फ्रॉड और हमेशा गड़बड़ाती प्रार्थियों के टेस्ट सेंटर की अल्गोरिद्य-आधारित मैपिंग, जिससे उन्हें अधिक पैसा खर्च करके बहुत दूर के केंद्र पर परीक्षा देने के लिए जाना पड़ता है। केंद्र सरकार को एनटीए के ब्लू प्रिंट की समीक्षा करनी चाहिए और कोचिंग इंस्टिट्यूट के मायाजाल का भी संज्ञान लेना चाहिए ताकि छात्र इस वार्षिक त्रासदी से सुरक्षित रह सके।
NTA की जबरदस्त विफलता
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने नीट यूजी-2026 को रद्द कर दिया क्योंकि मेडिकल प्रवेोश परीक्षा प्रश्न पत्र में अनेक प्रश्न वही थे, जो टेस्ट से पहले सार्वजनिक थे और छात्रों के हाथों में घूम रहे थे। सरकार ने प्रश्न पत्र लीक का मामला सीबीआई को सौंप दिया है और परीक्षा की नई तिथि जल्द घोषित की जाएगी, पेपर के रद्द किए जाने से लगभग 23 लाख छात्र प्रभावित हुए हैं।
लेख- शाहिद ए चौधरी के द्वारा
