MP के 1.5 लाख शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट का झटका! TET को लेकर कही बड़ी बात; जानें क्या है पूरा मामला
Supreme Court ON TET: सर्वोच्च न्यायालय ने TET परीक्षा से छूट देने से इनकार कर दिया है, कोर्ट ने साप कहा कि जितनी छूट दी जानी थी वो पहले ही दी जा चुकी है।
- Written By: सजल रघुवंशी
सुप्रीम कोर्ट(सोर्स- सोशल मीडिया)
MP Teacher TET Case Supreme Court: मध्य प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि पात्रता परीक्षा के नियमों में जितनी छूट दी जानी थी, वह पहले ही प्रदान की जा चुकी है। ऐसे में अब बिना परीक्षा उत्तीर्ण किए किसी को शिक्षक बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
दरअसल, साल 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट देने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं। इसी को लेकर आज यानी बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई और इसी दौरान कोर्ट ने अहम बात कही।
अब इसमें कोई छूट की संभावना नहीं है- सुप्रीम कोर्ट
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश में शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट देने की मांग से जुड़ी पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट की पीठ ने कहा कि पात्रता परीक्षा नियमों में आवश्यक रियायत पहले ही दी जा चुकी है और अब किसी अतिरिक्त छूट की संभावना नहीं है। अदालत ने साफ किया कि शिक्षक बनने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि वर्ष 2017 में नियम लागू होने के बाद 5 वर्ष की राहत अवधि दी गई थी, जिसकी अवधि अब पूरी हो चुकी है। हालांकि मामले में अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है।
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क्या था सुप्रीम कोर्ट का पुराना आदेश?
सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को अपने आदेश में कहा था कि वर्ष 1998 से 2009 के बीच मेरिट के आधार पर नियुक्त किए गए शिक्षकों के लिए भी टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों ने अदालत में पुनर्विचार याचिकाएं दायर कर पुराने शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर राहत देने की मांग की थी। इससे पहले कोर्ट यह भी स्पष्ट कर चुका है कि जो शिक्षक निर्धारित परीक्षा पास नहीं कर पाएंगे, उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं।
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जानें क्या है टीईटी परिक्षा
शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को एनसीटीई ने साल 2010 में अनिवार्य योग्यता के रूप में लागू किया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और शिक्षण कौशल मौजूद हों। मध्य प्रदेश में मौजूदा स्थिति यह है कि यदि अदालत से राहत नहीं मिलती, तो करीब डेढ़ लाख अनुभवी शिक्षकों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ सकती है। टीईटी में दो पेपर होते हैं, जिनमें पहला पेपर कक्षा 1 से 5 और दूसरा कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए आयोजित किया जाता है।
