

NEET Paper Leak Protests: दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के विभिन्न स्थानों पर नि नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले युवाओं को न्याय प्रदान करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ किसी भी राज्य में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह उचित निर्णय है। इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित अपना मार्च रद्द कर दिया।
अदालत ने जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को 3 माह में मुआवजा देने का निर्देश भी दिया। सरकारी अव्यवस्था व भ्रष्टाचार की वजह से बार-बार होने वाली पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आक्रोश स्वाभाविक था। पेपर लीक उनकी तैयारियों और मेहनत पर पानी फेर देती थी। उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था और परीक्षा रद्द होने पर नए सिरे से इम्तिहान की तैयारी करनी पड़ती थी। इससे धन और समय दोनों की बर्बादी होती थी।
उम्र बढ़ती जाती थी और गया हुआ वक्त वापस नहीं आता था। इनमें कितने ही युवा मध्यम व गरीब परिवार से आते हैं जिनके लिए बार-बार परीक्षा देना तकलीफदेह है। संपन्न और स्वार्थी तत्वों द्वारा की गई पेपर लीक का खामियाजा ईमानदार छात्रों को भुगतना पड़ता था। युवाओं को कोई शौक नहीं था, जो भूखे-प्यासे आंदोलन करने बैठते तथा लाठी प्रहार, आंसू गैस के गोले तथा पैलट गन के छरें का सामना करते।
एक भ्रष्ट सिस्टम ने उन्हें ऐसा करने पर मजबूर किया। वह आंदोलन कर न्याय मांगने पर विवश हुए। आंदोलन खत्म होने पर भी युवाओं में चिंता व्याप्त थी, क्योंकि जगह-जगह उन पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इससे आशंका बलवती हो गई थी कि उन्हें पढ़ाई छोड़कर कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ेंगे। उन पर लगाई धाराओं की वजह से उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता था। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने समयोचित फैसला लेकर युवा आंदोलनकारियों के खिलाफ देशभर में दर्ज एफआईआर रद्द कर दी।
पेपर लीक से व्यथित होकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने के मामले में न्यायालय ने केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर पूरे देश में एक नीति बनाने को कहा। यद्यपि केंद्र सरकार ने एफआईआर वापस लेने के बारे में सकारात्मक आश्वासन दिए थे, लेकिन सरकार के इरादों पर शंका बनी हुई थी। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा उसे न्यायिक मान्यता देने से प्रदर्शनकारी युवा निश्चिंत हो गए।
सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र कॉकरोच जनता पार्टी को दिए गए उन आश्वासनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है जिनके तहत दिल्ली व अन्य राज्यों की पुलिस प्रदर्शन के सिलसिले में दर्ज की गई प्राथमिकी पर आगे कोई कार्रवाई नहीं करेगी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि वह युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए पूर्ण न्याय करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अदालत ने आशा व्यक्त की कि यदि ऐसे पक्ष एक-दूसरे पर भरोसा दिखाएं तो सभी मुद्दों को एक-एक करके हल किया जा सकता है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा