

MPSC Paper Leak Case Rutuja Patil Police Custody: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की औषध निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्टर) परीक्षा पेपर लीक मामले बड़ी कार्रवाई हुई है। क्राइम ब्रांच की टीम ने मामले में अपनी जांच तेज करते हुए नंदुरबार से ऋतुजा पाटिल नामक महिला को गिरफ्तार किया है। बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में पेशी के दौरान ऋतुजा काफी भावुक हो गई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ऋतुजा को 3 दिन और अन्य आरोपियों को 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक मामले की जांच कर रही पुलिस ने अदालत को बताया कि मामले के आरोपी एमपीएससी अधिकारी विश्वेश्वर नकाते ने कथित तौर पर अपराध में इस्तेमाल किया गया लैपटॉप खाड़ी में फेंक दिया था। पुलिस ने खुलासा करते हुए बताया कि सबूत नष्ट करने के इरादे से लैपटॉप को खाड़ी में फेंका गया।
पुलिस का दावा है कि इसी लैपटॉप में ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा के 294 सवाल और उनके विकल्प दर्ज किए गए थे। पुलिस ने खाड़ी से लैपटॉप बरामद कर लिया है और उसमें मौजूद डेटा को रिकवर करने का प्रयास किया जा रहा है। अदालत को बताया गया कि इस डेटा से पेपर लीक मामले में महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना है।
जांच के दौरान नंदुरबार स्थित कौटिल्य क्लासेस के संचालक और आरोपी प्रवीण पाटिल के घर से आर्थिक लेन-देन से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। पुलिस ने अदालत से आरोपियों की सात दिन की हिरासत मांगी थी। पुलिस का कहना था कि जांच अभी जारी है और ऋतुजा पाटिल समेत आरोपियों की आमने-सामने पूछताछ करना जरूरी है।
पुलिस ने अदालत में यह भी दावा किया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और सवालों के संतोषजनक जवाब देने के बजाय टालमटोल कर रहे हैं। इसके बाद अदालत ने ऋतुजा पाटिल को तीन दिन और अन्य आरोपियों को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
गौरव के वकील ने अदालत में दावा किया कि ऋतुजा पाटील ने गौरव को प्रश्नसंच (Question Set) भेजा था। उनके अनुसार, गौरव को यह प्रश्नसंच 20 तारीख को मिला था, लेकिन ऋतुजा को यह जानकारी नहीं थी कि वह एमपीएससी का प्रश्नसंच है। बचाव पक्ष ने इसी आधार पर ऋतुजा की भूमिका को लेकर अदालत के सामने अपना पक्ष रखा।
औषध निरीक्षक गट-ब परीक्षा की कथित पेपर लीक मामले में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटना जनवरी 2026 में हुई थी, जबकि उन्होंने अध्यक्ष पद की शपथ 18 फरवरी और कार्यभार 3 मार्च 2026 को संभाला। इसलिए उनके कार्यकाल और पेपर लीक की घटना के बीच स्पष्ट अंतर है।
MPSC के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने कहा कि अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने मामले की गंभीरता को कम नहीं आंका। आयोग ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और जांच जारी है। भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए आयोग ने आंतरिक उच्चस्तरीय समिति बनाई है, जबकि सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए स्वतंत्र समिति गठित की है।
उन्होंने कहा कि आरोपों का आकलन व्यक्तिगत या राजनीतिक आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्यों, आधिकारिक रिकॉर्ड और सबूतों के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता मजबूत करना अपनी प्राथमिकता बताया।