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संपादकीय: सुरक्षित दर्शन के नाम पर फिर फेल हुआ भीड़ का मैनेजमेंट, तिरुपति मंदिर हादसे से सबक लेना जरूरी

तिरूपति बालाजी मंदिर हादसे के बाद सुरक्षा कर्मचारियों की तादाद बढ़ाकर तथा प्रवेश और निर्गम के मार्ग पर निगरानी रखकर ऐसे हादसे रोके जा सकते हैं। ऐसे ही महाकुंभ मेले में भी कड़ी सुरक्षा इंतजाम होने चाहिए।

  • By दीपिका पाल
Updated On: Jan 11, 2025 | 01:12 PM

तिरुपति बालाजी मंदिर हादसे से सबक (सौ.डिजाइन फोटो)

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नवभारत डिजिटल डेस्क: आंध्रप्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर में भक्तों की सर्वाधिक भीड़ होती है। वैकुंठ एकादशी के 2 दिन पूर्व वहां वैकुंठ द्वार सर्व दर्शन के लिए टोकन बांटे जा रहे थे तभी एक बीमार भक्त को कतार से निकाल कर बाहर ले जाने के लिए गेट खोले गए। इससे कुछ श्रद्धालु लाइन तोड़कर आगे बढ़े और भगदड़ मच गई। इसमें कुचलकर 6 व्यक्ति मारे गए तथा 30 से ज्यादा घायल हो गए। टोकन लेने के लिए हजारों लोगों की भीड़ लगी थी। वैकुंठ एकादशी के आसपास वहां प्रतिवर्ष 2 से 3 लाख दर्शनार्थियों की भीड़ होती है।

यह मान्यता है कि वैकुंठ द्वार से भगवान के दर्शन करने पर भक्त को वैकुंठ में स्थान मिलता है। यह हादसा तिरुपति के विष्णु निवास और रामानायडू क्षेत्र के पास हुआ। पुलिस, सुरक्षाकर्मी व मंदिर के कर्मचारी भगदड़ को रोकने में विफल रहे। जहां लाखों की भीड़ उमड़ती है वहां कतार के लिए कठघरे लगाकर और सुरक्षा कर्मियों की निगरानी रखकर ही लोगों को नियंत्रित रखा जा सकता है। गत वर्ष भी उत्तरप्रदेश के एक धार्मिक समारोह में भगदड़ मचने से 120 से ज्यादा लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। देश के प्रसिद्ध मंदिरों, धार्मिक समारोहों, प्रवचन स्थलों व मेले में उमड़ने वाली भारी भीड़ में यदि भगदड़ मची तो स्त्री, बच्चे और वृद्ध चपेट में आ जाते हैं। जो धक्का लगने से गिरा वह उठ नहीं पाता और अन्य लोग उसे रौंदते-कुचलते हुए आगे बढ़ जाते हैं। कोई किसी को उठाने या बचाने की कोशिश करे तो वह भी कुचला जा सकता है।

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि भारी भीड़ की वजह से ऐसा हुआ। इस हादसे की उच्च स्तरीय जांच का आदेश दे दिया गया है। जाहिर है कि पुलिस और देवस्थानम के अधिकारियों की लापरवाही से ऐसा हुआ। अचानक गेट खोलने से भीड़ कतार तोड़कर उस ओर दौड़ पड़ी। सुरक्षा कर्मचारियों की तादाद बढ़ाकर तथा प्रवेश और निर्गम के मार्ग पर निगरानी रखकर ऐसे हादसे रोके जा सकते हैं। ऐसे ही प्रयागराज में होनेवाले महाकुंभ मेले में भी कड़ी सुरक्षा इंतजाम होने चाहिए।

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1954 में वहां मची भगदड़ में हजारों लोगों की मौत हुई थी। खास तौर पर नेता-अभिनेता और वीआईपी को देखने भीड़ उमड़ पड़ती है इसलिए अत्यंत सतर्कता आवश्यक है। ऐसे हादसे मथुरा, वैष्णोदेवी, केरल के सबरीमाला और सातारा के मांढरादेवी धर्मस्थलों में हो चुके हैं। जरूरत हो तो भीड़ नियंत्रण के लिए एआई का उपयोग किया जाए। गत वर्ष तिरुपति बालाजी मंदिर में 2।55 करोड़ तीर्थयात्री आए थे और 1,365 करोड़ रुपए हुंडी में जमा हुए थे। वहां की व्यवस्था की लोग सराहना करते हैं लेकिन यदि भीड़ पर नियंत्रण न हो तो ऐसे हादसे हो जाते हैं।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

Necessary to learn a lesson from the tirupati temple accident

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Published On: Jan 11, 2025 | 01:04 PM

Topics:  

  • Tirupati Balaji Temple

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