Navbharat Nishanebaaz: न्यायपालिका लोकतंत्र का पिलर, जज निकला LPG डीलर
Navabharat Nishanebaaz: दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और मणिपुर हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश सिद्धार्थ मृदुल की एलपीजी डीलरशिप को लेकर उठे सवालों से न्यायिक आचरण पर बहस तेज हो गई है।
- Written By: अनन्या तिवारी
नवभारत निशानेबाज (डिजाइन फोटो)
Indian Judiciary Code Of Conduct For Judges: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, आप राजनेताओं के भ्रष्टाचार की जितनी चाहे आलोचना कर सकते हैं लेकिन जजों की ओर उंगली नहीं उठा सकते। इसीलिए कुछ जजों का भ्रष्टाचार कार्पेट के नीचे जमी धूल के समान छिप जाता है।’
हमने कहा, ‘न्यायपालिका का उचित व पूर्ण सम्मान करते हुए हम कहेंगे कि कुछ न्यायाधीशों का आचरण सही नहीं होता। वह कानून के रखवाले न होकर उसके साथ खिलवाड़ करते हैं। खबर है कि दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज ने जो बाद में मणिपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने, पद पर रहते हुए व्यवसाय किया और न्यायिक सेवा नियमों की मट्टीपलीद कर दी।
पड़ोसी कहा, ने ‘निशानेबाज, हम आपको फिर चेतावनी दे रहे हैं कि जजमेंट करना जज का काम है। आप किसी जज के कार्यकलाप के बारे में कोई जजमेंट मत लीजिए। उस ओर झांकिए भी मत ! कुछ चीजों की अनदेखी करने में ही समझदारी है। आपने अंग्रेजी कहावतें सुनी होंगी- किंग कैन डू नो रॉन्ग अर्थात राजा कोई गलती नहीं कर सकता। सीजर्स वाइफ इज अबाउ ससपीशियन मतलब सम्राट सीजर की पत्नी संदेह से परे है।’
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हमने कहा, ‘आपने शेर सुना होगा- हकीकत छुप नहीं सकती कभी झूठे उसूलों से, खुशबू आ नहीं सकती कागज के फूलों से! कोई इन फूलों पर परफ्यूम छिड़क दे तो अलग बात है। मार्च 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के बंगले में आग लगी थी, जहां आग बुझा रहे दमकल कर्मियों को अधजले नोटों के बंडल मिले। जज ने सफाई दी थी कि मेरी गैरहाजिरी में कई लोग मेरे घर आते-जाते हैं। मुझे क्या पता, कोई नोटों का बंडल रखकर चला गया होगा। अब समाचार है कि मणिपुर के रिटायर्ड चीफ जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल जज के रूप में अपने 16 वर्ष के पूरे कार्यकाल में रसोई गैस एजेंसी चला रहे थे। उनकी कंपनी का नाम किचनफ्लेम था। उन्होंने 1984 में एलपीजी एजेंसी ली। फिर 2 वर्ष बाद वकालत शुरू की। 2008 में दिल्ली हाईकोर्ट के जज बने। 2023 में मणिपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने लेकिन अपनी गैस एजेंसी कायम रखी। न्यायदान के साथ गृहिणियों को रसोई गैस प्रदान करते रहे। 2025 में उन्होंने फिर अपनी डीलरशिप का 5 वर्ष के लिए नवीनीकरण कर लिया।’
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पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, यह मत भूलिए कि समाज में अच्छे-बुरे, ईमानदार-बेईमान हर प्रकार के लोग होते हैं। जज भी इसी समाज से आते हैं। कभी-कभी बासमती चावल में भी कंकर निकल आता है। क्या पतितपावनी गंगा में प्रदूषण रहता? इतना जरूर है कि खुद की एजेंसी होने से उस जज के घर में कभी गैस की कमी हो ही नहीं सकती।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
