

एमपीएससी परीक्षा में धांधली की जांच समिति के सचिव बने तुकाराम मुंढे, युवाओं की उम्मीदें बढ़ीं।
पुणे में 11 दिन चला आंदोलन खत्म, अब जांच और सुधारों पर टिकी नजरें।
पेपर लीक और भ्रष्टाचार की शिकायतों पर जवाबदेही तय करने की मांग।
पारदर्शी परीक्षा प्रणाली बनाने और एमपीएससी की विश्वसनीयता बहाल करने की चुनौती।
Tukaram Mundhe MPSC Investigation: महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षा में हुई धांधली की पड़ताल करने के लिए गठित जांच समिति के सचिव पद पर तुकाराम मुंढे की नियुक्ति से उन हजारों युवाओं की आशा पुनर्जीवित हो उठी है, जो आयोग की परीक्षाओं में बैठना चाहते हैं।
पुणे में एमपीएससी के कारनामों और पेपर लीक के विरोध में 11 दिनों तक चला आंदोलन समाप्त हो गया, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है। क्या युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाला एमपीएससी जांच के बाद अपनी विश्वसनीयता पुनः हासिल कर पाएगा अथवा सिर्फ दिखावटी सुधार कर लोगों को बहला दिया जाएगा? जहां तक तुकाराम मुंढे की साख का सवाल है, वह सख्त और ईमानदार अधिकारी रहे हैं।
वह कानून का पूरी तरह इस्तेमाल कर बिगड़ी हुई व्यवस्था को सुधारने का यथासंभव प्रयास करते हैं। कभी-कभी उनकी सख्ती भी संबंधित व्यक्तियों को अखरती है, जिस वजह से उनका एक सेॉ दूसरे विभाग में तबादला कर दिया जाता है। उन्हें जनसमर्थन तो मिलता है, लेकिन संस्थागत सुधार पूरा करने से पहले ही शक्तिशाली लॉबी उनके पीछे पड़ जाती है।
अभी तुकाराम मुंढे के समक्ष एमपीएससी परीक्षा में पेपर लीक तथा नियुक्तियों में भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच करने की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उन्हें एक ऐसी प्रणाली या व्यवस्था निर्मित करनी है, जिसमें ऐसी शिकायतें न आएं जिनकी वजह से परीक्षार्थियों को आंदोलन करने सड़कों पर उतरना पड़ता है। पुणे के एस.एम. जोशी ब्रिज पर हुआ आंदोलन उन युवाओं के आक्रोश, असंतोष को दर्शाता था, जिन्होंने प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं के लिए कई वर्षों तक जी-जान लगाकर पूरी मेहनत से तैयारी की थी। इसके लिए धन व समय खर्च किया था।
परीक्षा में धांधली व पेपर लीक ने उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया। उनके साथ विश्वासघात किया गया। अवकाशप्राप्त न्यायाधीश दिलीप भोसले के नेतृत्व वाली जांच समिति को तथ्यान्वेषण करते हुए जिम्मेदारी तय करनी होगी तथा भविष्य के लिए ऐसे सुधारों का सुझाव देना होगा, जो पारदर्शिता लाएं और लागू किए जा सकें।
एमपीएससी के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के जांच पूरी होने तक लंबी छुट्टी पर जाने के निर्णय से गतिरोध टूटा। इतने पर भी पेपर लीक और कुप्रबंध की जवाबदेही को उचित प्रक्रिया व सबूतों से निश्चित करना होगा। एमपीएससी के प्रति अविश्वास दूर करते हुए उसकी कमजोरियों का निराकरण करना आवश्यक है। मुद्दा यह है कि प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं में अनियमितता होती ही क्यों है? व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें कोई सेंध न लगा पाए। यदि पेपर लीक व भष्टाचार से अयोग्य लोग चुने जाएंगे, तो पूरे सिस्टम और उसकी गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लग जाएगा।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा