एमपीएससी आंदोलन के 3 टुकड़े! परीक्षा पद्धति को लेकर विद्यार्थी ही आमने-सामने, तीन जगहों पर तीन अलग मांगें

Pune MPSC Student Protest: MPSC परीक्षा पद्धति को लेकर पुणे में छात्रों के बीच मतभेद उजागर। अलका चौक, एस. एम. जोशी पुल और अहिल्या अभ्यासिका पर अलग-अलग मांगों को लेकर 3 आंदोलन जारी।
mpsc protest pune students divided over exam pattern
MPSC आंदोलन(सोर्स: एआई फोटो)
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MPSC Protest Pune Students Divided: MPSC की परीक्षा पद्धति और विभिन्न मांगों को लेकर पुणे में चल रहे विद्यार्थी आंदोलन में अब मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। एमपीएससी के खिलाफ विद्यार्थियों का असंतोष कायम है, लेकिन परीक्षा पद्धति को लेकर उनकी भूमिका एक जैसी नहीं है। इसके चलते पुणे में तिलक चौक (आलका चौक), एस. एम. जोशी पुल और लालबहादुर शास्त्री मार्ग स्थित अहिल्या अभ्यासिका के सामने तीन अलग-अलग स्थानों पर आंदोलन शुरू हैं।

एक जगह वर्णनात्मक पद्धति कायम रखने की मांग हो रही है, तो दूसरी जगह वस्तुनिष्ठ पद्धति के समर्थन में विद्यार्थी आंदोलन कर रहे हैं। वहीं एस. एम. जोशी पुल के आंदोलन में परीक्षा पद्धति के साथ एमपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे समेत विभिन्न मांगें उठाई जा रही हैं। इससे आंदोलन में एकजुटता के बजाय मतभेद की तस्वीर सामने आई है।

एस. एम. जोशी पुल पर अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग

एस. एम. जोशी पुल पर विधायक रोहित पवार के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में एमपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग प्रमुखता से की जा रही है। विद्यार्थियों की ओर से 70 हजार पदों की मेगा भर्ती तत्काल शुरू करने की मांग भी की गई है। विद्यार्थियों को विश्वास में लेकर स्वच्छ छवि वाले नए अध्यक्ष की नियुक्ति की जाए, एमपीएससी की सभी परीक्षाएं ऑफलाइन पद्धति से आयोजित की जाएं और विभिन्न परीक्षाओं को लेकर नियुक्त एसआईटी से निष्पक्ष जांच कराई जाए, ऐसी मांगें भी हैं।

इसके अलावा राजस्थान की तर्ज पर 100 रुपए के कार्ड पर पूरे वर्ष की सभी परीक्षाएं आयोजित करने की मांग आंदोलनकारियों ने रखी है। इस आंदोलन में परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के साथ भर्ती और आयोग के कामकाज से जुड़े व्यापक मुद्दे उठाए जा रहे हैं।

वर्णनात्मक पद्धति के समर्थन में ठिय्या

दूसरी ओर, टिलक चौक पर विद्यार्थियों का आंदोलन मुख्य रूप से परीक्षा पद्धति के मुद्दे पर केंद्रित है। यहां वर्णनात्मक पद्धति को कायम रखने की मांग की जा रही है। विद्यार्थियों का कहना है कि पिछले दो-तीन वर्षों से अनेक परीक्षार्थी इसी पद्धति को ध्यान में रखकर तैयारी कर रहे हैं। ऐसे समय में अचानक वस्तुनिष्ठ पद्धति लागू करने का निर्णय लिया गया तो विद्यार्थियों की तैयारी बेकार हो जाएगी और उन्हें आर्थिक तथा मानसिक नुकसान उठाना पड़ेगा। विद्यार्थी गुणवंत सावळकर ने कहा, ‘हम प्रयोगशाला के चूहे नहीं हैं।

हम पर बार-बार प्रयोग करके परीक्षा पद्धति नहीं बदली जानी चाहिए।’ प्रशासन को किस तरह के अधिकारियों की आवश्यकता है, इसके आधार पर परीक्षा पद्धति तय की जानी चाहिए। वर्णनात्मक पद्धति में खामियां हैं तो उन्हें दूर कर प्रभावी तरीके से लागू किया जाना चाहिए, ऐसी भूमिका उन्होंने रखी।

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विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट का इंतजार

एक विद्यार्थी ने कहा कि परीक्षा पद्धति में बदलाव विद्यार्थियों की संख्या या सड़क पर दिखाई देने वाली भीड़ के दबाव में नहीं होना चाहिए। इस संबंध में विशेषज्ञों की सिफारिश के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए। सरकार द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समिति की आधिकारिक रिपोर्ट आने तक प्रतीक्षा करना उचित होगा, ऐसा उन्होंने कहा।

अहिल्या अभ्यासिका के सामने वस्तुनिष्ठ पद्धति का समर्थन

इसी बीच लालबहादुर शास्त्री मार्ग स्थित अहिल्या अभ्यासिका के सामने चल रहे आंदोलन में विद्यार्थी वस्तुनिष्ठ यानी बहुविकल्पीय प्रश्न पद्धति के समर्थन में खड़े हैं। इससे वर्णनात्मक पद्धति को कायम रखने की मांग करने वाले विद्यार्थियों के साथ उनके मतभेद स्पष्ट हो गए हैं। एक ही परीक्षा व्यवस्था को लेकर विद्यार्थियों के दो गुट आमने-सामने आने से आंदोलन का स्वरूप और अधिक जटिल हो गया है।

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एक आंदोलन, लेकिन तीन अलग-अलग दिशाएं

एमपीएससी के खिलाफ विद्यार्थियों की नाराजगी एक मुद्दे तक सीमित नहीं है। भर्ती, परीक्षा प्रक्रिया, अध्यक्ष का इस्तीफा, ऑफलाइन परीक्षा और परीक्षा पद्धति में बदलाव जैसे कई मुद्दे आंदोलन में उठाए जा रहे हैं। हालांकि, परीक्षा पद्धति के सवाल पर विद्यार्थियों की एक राय नहीं होने से आंदोलन तीन अलग-अलग स्थानों और अलग-अलग मांगों में बंट गया है।एक ओर वर्णनात्मक पद्धति जारी रखने की मांग है, तो दूसरी ओर वस्तुनिष्ठ पद्धति का समर्थन किया जा रहा है।

वहीं तीसरे आंदोलन में आयोग के कामकाज और अध्यक्ष के इस्तीफे सहित व्यापक सुधारों की मांग है। एमपीएससी के खिलाफ असंतोष कायम रहने के बावजूद आंदोलन की एकजुट दिशा अब स्पष्ट नहीं रही है। परीक्षा पद्धति पर मतभेद ने विद्यार्थियों के आंदोलन में पड़ी दरार को सार्वजनिक कर दिया है।

नवभारत लाइव के लिये समीर सय्यद की रिपोर्ट

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