Navabharat Nishanebaaz: समझो सच तो होगे खुशहाल, संघ वटवृक्ष, BJP है डाल
Mohan Bhagwat Statement: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के राजनीति से संघ के सीधे संबंध नहीं होने वाले बयान के बाद संघ और बीजेपी के रिश्तों तथा उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर चर्चा तेज हो गई है।
- Written By: अंकिता पटेल
(सोर्स : नवभारत डिजाइन फोटो )
RSS BJP Political Relationship: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ का काम सिर्फ राष्ट्रभक्त अनुशासित स्वयंसेवक तैयार करना है। राजनीति से उसका कोई सीधा संबंध नहीं है।’
हमने कहा, ‘देशवासी तो यही जानते हैं कि असली वटवृक्ष संघ है और बीजेपी उस वृक्ष की डाल ! संघ है फैक्ट्री और बीजेपी उसका माल! संघ के स्वयंसेवकों की संगठनशक्ति ही असली ताकत है। आरएसएस इनडायरेक्टली राजनीति चलाता है। वह मदरबोर्ड है तो बीजेपी मॉनिटर! आरएसएस ने पहले 1951 में जनसंघ बनाया जिसके अध्यक्ष डा। श्यामाप्रसाद मुखर्जी थे। संघ ने 1977 में समाजवादियों तथा कुछ पूर्व कांग्रेसी नेताओं का तालमेल जमाकर जनता पार्टी बनवाई थी। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन के पीछे संघ की ताकत थी।
जब समाजवादी नेता मधु लिमये और राजनारायण ने दोहरी सदस्यता के मुद्दे पर आपत्ति जताई तो अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी ने आरएसएस के प्रति अपनी पूर्ण और अविचल निष्ठा दोहराते हुए मोरारजी देसाई की सरकार से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने 1980 में बीजेपी बना ली। एक समय ऐसा भी था जब आरएसएस के लोग कहते थे कि संघ बाह्य विश्व या संघ से बाहर की दुनिया कैसी है, हम सोच भी नहीं सकते। आज वही आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा स्वैच्छिक संगठन बन गया है। संघ की सेंचुरी पूरी हो चुकी है फिर भी उसके स्वयंसेवक कहते हैं-संघ शक्ति युगे युगे !’
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पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, बीजेपी में कुछ ऐसे भी नेता हैं जो संघ बैकग्राउंड के नहीं हैं। राजनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए पार्टी अन्य दलों को तोड़फोड़ कर उनके सांसदों-विधायकों को अपने साथ लेती चली जा रही है। राजनीतिक स्वार्थ के फेविकाल से लोग जुड़ते चले जा रहे हैं।’
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हमने कहा, ‘मोदी और अमित शाह इस प्रवाह को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। यह सधी हुई रणनीति है जिससे देश में विपक्ष का सफाया हो जाए और एकमत से सरकार चले। विरोध या अवरोध कुछ भी न रहे। इधर सदन में बिल पेश किया और बगैर किसी चर्चा के मिनिटों में पास करा लिया! विपक्षी पार्टियों का बिखराव बीजेपी की ताकत को लगातार बढ़ा रहा है। जब हो दबाव या प्रलोभन, तो उजड़ता रहेगा विपक्ष का चमन !’
