नवभारत विशेष: पहले नेता-मंत्री छोड़ेंगे गाड़ी-घोड़े का तामझाम, सरकारी तंत्र पर लागू होगा PM का सादगी पैगाम
PM Modi Energy Crisis: प्रधानमंत्री की ईंधन बचत अपील पर व्यंग्यात्मक अंदाज में राजनीतिक व्यवस्था, मंत्रियों की जीवनशैली और सरकारी फैसलों को लेकर कटाक्ष किया गया है।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रधानमंत्री मोदी, ईंधन बचत, (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Modi Ethanol Fuel Push: सुबह उठते ही लगा कि अचानक हमारे भारत महान का से मूड मोदीमय हो गया। हैदराबाद को जिंदाबाद कहना होगा जिससे पीएम के प्रबोधन वाली वह दिव्य आवाज निकली जो इसके पहले कभी लाल किले के संबोधन में भी नहीं निकली थी। जनता देखकर चकित हो गई कि केंद्र और राज्यों के तमाम मंत्री और सांसद अपनी पेट्रोल-डीजल चलने वाली कीमती गाड़ियां छोड़कर पैदल चलने लगे या भारी गर्मी में बस स्टॉप पर खड़े होकर ई-बस का इंतजार करते नजर आए। सभी ने प्रधानमंत्री का ज्ञानोपदेश आंख मूंदकर स्वीकार कर लिया था।
मंत्रियों और सांसदों ने एकमत से अपने वेतन-भत्ते त्यागने का निर्णय लिया, क्योंकि पीएम ने राष्ट्रीय संकट और अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ के प्रति उन्हें जागृत किया था। वीवीआईपी की दर्जनभर गाड़ियों का काफिला नदारद हो गया, जब भीषण ऊर्जा संकट है तो पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ी चलाने का दुस्साहस कौन करेगा ? अच्छा हुआ पीएम ने सबकी आंखें खोल दी। सड़क परिवहन मंत्री ऐसी गाड़ी लेकर आए जिसमें पूरा स्वदेशी इथेनॉल भरा हुआ था। इथेनॉल की गाड़ी में गीत गूंज रहा था- साडे नाल रहोगे तो ऐश करोगे? उस गाड़ी में सारे मंत्री जैसे-तैसे सवार हो गए। अधिकारी
शादी-सगाई पर ‘एक साल रोक’ का तंज
धक्का देने लगे पर गाड़ी स्टार्ट ही नहीं हो पाई। इतने में एक वरिष्ठ मंत्री आए और बोले कि हमने अपनी बेटी की शादी का जो निमंत्रण दिया था वह कैंसिल समझो। अब साल भर कोई शादी नहीं। न सगाई न विवाह, न सोने के गहनों की चाह! जो भी ज्वेलर की दुकान पर स्वर्णाभूषण खरीदेगा इंडी उसे पकड़ने के लिए रेडी रहेगी। जब देश का प्रधानसेवक अकेले रह सकता है तो क्या युवा पीढ़ी 1 वर्ष ‘में कुंवारा तू कुंवारी’ के रूप में नहीं रह सकते। जब सहजीवन का कल्चर चल पड़ा है तो बैंड-बाजा बारात की क्या जरूरत। ‘बिंदिया चमकेगी, चूड़ी खनकेगी’ जैसा गाना बजने पर भी बैन लगाया जाए क्योंकि यह लोगों को स्वर्णाभूषण खरीदने के लिए प्रेरित करता है। कोई यह भी न गाए-‘ओय होय तेरा कंगना रे।’
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मन की मौज
एक बार मोरारजी देसाई ने गोल्ड कंट्रोल लागू कर देश के सुनारों का धंधा बंद कर दिया था, अब देश के कर्णधार ज्वेलर्स के शोरूम में सन्नाटा ला देंगे। ज्वेलर्स को झालमुड़ी बेचने की नौबत आ जाएगी, वहां ग्राहकों को रोकने के लिए गीत गूंजेगा ‘अंदर से कोई बाहर न जा सके, बाहर से कोई अंदर न आ सके। सोचो जरा ऐसा हो तो क्या हो।’ पार्टी की महिला सेल की सदस्याएं त्याग का परिचय देते हुए गाने लगेंगी ‘सोना ले जा रे, चांदी ले जा रे!’ गांव-देहात के लोग बोलेंगे हमें पीएम का आदेश मानना है जल्दी से हमारे यहां मेट्रो चलाओ। उसमें बैठेंगे क्योंकि ऊर्जा की बचत करनी है।
कार पूल का उपदेश देने वाले नेता रास्ता चलते लोगों को कहेंगे ‘आ-जा मेरी गाड़ी में बैठ जा।’ सभी को प्राइवेट गाड़ी में लिफ्ट मिलेगी, टैक्सी ऑटो वाले फाका करेंगे क्योंकि देश में कोई भी पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल नहीं करना चाहेगा। देशवासी बैलगाड़ी युग में लौटने को तत्पर हो जाएंगे, ‘गाड़ी वाले गाड़ी धीरे हांक रे’ गाते हुए बुलक कार्ट में बैठेंगे, शहरों में अचानक घोड़ामाड़ियां चलने लगेंगी।
सड़कों पर घोड़े की लीद पड़ी नजर आएगी। मनचले गाने लगेंगे ‘टमटम से झांको ना रानीजी, गाड़ी से गाड़ी लड़ जाएगी विक्टोरिया नंबर 203 फिल्म की हॉर्स कैरिज चलेगी जिसमें बैठे शीर्ष नेता गाएंगे-‘दो बेचारे बिना सहारे देखो पूछ-पूछ के हारे।
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जनता पूछेगी कि पिछले 12 वर्ष से आपकी सरकार है फिर भी इकोनॉमी का इतना बुरा हाल है। राज्यों में आपको पकड़ गहरी है लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपए की सेंचुरी है। भाई नहीं जमता तो वैसा साफ-साफ बोलो, पब्लिक को इस तरह तो मत छलो।
