

Maharashtra Women Crime 2024: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की नवीनतम क्राइम इन इंडिया 2024 रिपोर्ट ने महाराष्ट्र में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को लेकर एक गंभीर बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। बढ़ते मामलों की संख्या, देश में पॉक्सो के तहत सबसे अधिक दर्ज मामले, कम दोषसिद्धि दर और बढ़ता न्यायिक लंबित भार-इन सभी मुद्दों पर केवल राजनीतिक क्यानबाजी पर्याप्त नहीं है। इसके लिए पारदर्शी शासन, संस्थागत जवाबदेही और तत्काल नीतिगत सुधार की आवश्यकता है।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा राज्य की सर्वोच्च जिम्मेदारियों में शामिल है। सरकारों से केवल कानून बनाने की अपेक्षा नहीं की जाती, बल्कि यह भी अपेक्षित है कि न्याय समयबद्ध तरीके से मिले। जब सरकारी आंकड़े दर्ज अपराधों में लगातार वृद्धि, कम दोषसिद्धि दर और अस्वीकार्य न्यायिक देरी की ओर संकेत करते हैं, तो इसकी गंभीर समीक्षा आवश्यक हो जाती है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में महाराष्ट्र में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के 47,954 मामले दर्ज किए गए, जो देश में दर्ज ऐसे कुल अपराधों का 10.86 प्रतिशत है।
महाराष्ट्र की राष्ट्रीय जनसंख्या में हिस्सेदारी लगभग 9.1 प्रतिशत अनुमानित है। इससे संकेत मिलता है कि महिलाओं के खिलाफ दर्ज अपराधों में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी उसकी जनसंख्या के अनुपात से अधिक है। यह प्रवृत्ति विशेष रूप से चिंताजनक है। महिलाओं के खिलाफ अपराध वर्ष 2022 में 45,331 से बढ़कर 2023 में 47,101 और 2024 में 47,954 हो गए, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर कुल संख्या में कमी आई।
यह वृद्धि अधिक शिकायत दर्ज होने, बेहतर पुलिस कार्रवाई या वास्तविक अपराधों में वृद्धि में से किस कारण हुई, यह केवल इन आंकड़ों के आधार पर निर्धारित नहीं किया जा सकता। हालांकि, राष्ट्रीय प्रवृत्ति से महाराष्ट्र का अलग रुख शासन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल जरूर खड़े करता है। अपराधों की प्रकृति को देखें तो चुनौती व्यापक है। सबसे अधिक मामले पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 10,538, इसके बाद महिलाओं के अपहरण और बहला-फुसलाकर ले जाने के 10,427 मामले हैं।
रिपोर्ट में पॉक्सो अधिनियम के तहत 9,245 मामले, महिला की गरिमा भंग करने के उद्देश्य से हमले के 5,857 मामले और दुष्कर्म के 3,091 मामले भी दर्ज हैं। इसके अलावा यौन उत्पीड़न और पीछा करने के मामले भी सामने आए हैं। इससे स्पष्ट है कि महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा किसी एक श्रेणी तक सीमित नहीं है।
अपराधों का अधिक संख्या में दर्ज होना कभी-कभी शिकायत दर्ज कराने में पीड़ितों के बढ़ते विश्वास, पुलिस द्वारा मामलों के बेहतर पंजीकरण या लोगों में बढ़ती जागरूकता का संकेत भी हो सकता है। लेकिन इन आंकड़ों का स्तर और लगातार बने रहना, विशेष रूप से उन राज्यों की तुलना में जो अधिक विकसित हैं और जिनकी प्रति व्यक्ति आय अधिक है, गंभीर जांच की मांग करता है।
इसे आसानी से समझाने के बजाय इसकी गहराई से समीक्षा होनी चाहिए। महाराष्ट्र में देश में पॉक्सो के तहत सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए, कुल 9,432 मामले दर्ज हुए और अपराध दर प्रति लाख 26.1 रही, जबकि राष्ट्रीय दर प्रति लाख 15.6 है।
इनमें से 4,829 मामले पॉक्सो अधिनियम की धाराओं 4 और 6 के तहत दर्ज हुए, जिनमें 4,722 मामले लड़कियों से संबंधित थे। ये आंकड़े बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने, अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी हस्तक्षेप करने, स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने, विशेष जांच इकाइयों को मजबूत करने और पीड़ितों को सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट का जारी होना इस बात की पड़ताल का अवसर देता है कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए संस्थाएं कितनी प्रभावी ढंग से काम कर रही हैं, न्याय दिलाने में कितनी सक्षम हैं और उभरती सामाजिक चुनौतियों का किस प्रकार सामना कर रही हैं। महाराष्ट्र में महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़े आंकड़े दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी नागरिकों के लिए चिंता का विषय हैं और शासन, प्रशासनिक प्रभावशीलता तथा संस्थागत कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
लेख- महाराष्ट्र, पूर्व मुख्यमंत्री, पृथ्वीराज चव्हाण के द्वारा