महाराष्ट्र रेडी रेकनर दर (डिजाइन फोटो)
Maharashtra Ready Reckoner Rates: शहरीकरण के मामलों में महाराष्ट्र देश का अग्रणी राज्य शा है। मुंबई, पुणे, नागपुर में बड़े पैमाने पर आवास निर्माण होने से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। इससे अर्थव्यवस्था गतिशील होती है तथा बढ़ती आबादी को आवास मिलता है। हर व्यक्ति का सपना होता है कि उनका अपना घर हो। किराये के मकान में रहने की बजाय किस्त देकर स्वयं का मकान हासिल करना हर प्रकार से बेहतर व सुविधाजनक है। इसके बावजूद गृहनिर्माण सामग्री, मजदूरी व अन्य लागत बढ़ जाने से मकान खरीदना काफी महंगा हो गया है। ऐसे में सहकारी सोसाइटी बनाकर गृहनिर्माण एक अच्छा विकल्प है।
महाराष्ट्र सरकार ने घर या प्लॉट खरीदी के लिए लागू वार्षिक बाजार मूल्य (Ready Reckoner) दर स्थिर रखने का निर्णय लिया है, जो सुसंगत व व्यावहारिक है। पंजीयन व मुद्रांक शुल्क विभाग ने इस वर्ष रेडी रेकनर की दर में 5 से 8 प्रतिशत वृद्धि का सुझाव दिया था। लेकिन बिल्डर्स की मांग थी कि बाजार की परिस्थिति देखते हुए रेडी रेकनर की दर न बढ़ाई जाए। सारे हालात पर गौर करते हुए राज्य सरकार ने दर नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया। इससे गृहनिर्माण उद्योग व ग्राहकों को राहत मिली है। 2019-20 में कोविड की वजह से अर्थव्यवस्था को झटका लगा था। लोगों का रोजगार छिन गया था। तब अनेक लोगों ने घर खरीदी का विचार छोड़ दिया था। गृहनिर्माण से लोहा, सीमेंट, टाइल, लकड़ी आदि की बिक्री होती है तथा श्रमिकों को रोजगार मिलता है।
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प्रधानमंत्री गृहनिर्माण योजना से विशेष रूप में ग्रामीण क्षेत्रों में मकान बनाने को प्रोत्साहन मिला। पिछले कुछ वर्षों से शहरों के रेडी रेकनर में काफी वृद्धि की गई, जिससे प्रॉपर्टी का वैल्यू बढ़ा। सरकार की नीति की वजह से चटाई क्षेत्र या बिल्डअप एरिया बढ़ गया है। जमीन की कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं। जहां पहले खेती की जमीन थी, वह इलाके गृहनिर्माण में आ गए हैं। साथ में केंद्र, राज्य सरकार व स्थानीय निकाय के कर-उपकर भी बढ़े हैं। इससे मकानों की कीमत में वृद्धि हुई है।
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से महंगाई बढ़ी है। गृहनिर्माण सामग्री भी काफी महंगी हुई है। लघु उद्योगों के सामने बंद होने का संकट पैदा हो गया है। एआई की वजह से नौकरियां भी कम हो रही हैं। ऐसे समय सरकार ने रेडी रेकनर की दर नहीं बढ़ाने का निर्णय लेकर बहुत सही कदम उठाया। दर वृद्धि नहीं करने पर भी सरकार को काफी राजस्व मिल सकता है। प्रधानमंत्री भी चाहते हैं कि देश में आवास निर्माण को गति मिले। इसलिए महाराष्ट्र सरकार का फैसला इस नीति को आगे बढ़ाने वाला है।