Muslim Reservation रद्द करने पर बवाल, बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब, जानें क्या है मामला

Maharashtra Muslim Reservation: महाराष्ट्र सरकार द्वारा मुस्लिम आरक्षण रद्द करने के फैसले पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सरकार को नोटिस जारी कर 3 सप्ताह में जवाब दाखिल करने कहा।
Bombay High Court has sought a response from Maharashtra government regarding cancelling Muslim reservation
कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
Updated on

Bombay High Court Notice To Maharashtra Government: महाराष्ट्र में मुस्लिम समुदाय को मिलने वाले 5 फीसदी आरक्षण को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर कानूनी तलवार लटक गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को इस मामले में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र सरकार को अपना रुख स्पष्ट करने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति आर.आई. छागला और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने स्पष्ट किया कि सरकार को एक हलफनामे के माध्यम से तीन हफ्ते के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 मई की तारीख तय की है।

क्या है पूरा विवाद?

यह कानूनी लड़ाई अधिवक्ता सैयद एजाज अब्बास नकवी द्वारा दायर एक याचिका से शुरू हुई है। इस याचिका में महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग द्वारा 17 फरवरी को जारी किए गए उस सरकारी आदेश (GR) को चुनौती दी गई है, जिसमें मुस्लिम आरक्षण को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया गया था। सरकार का तर्क था कि यह आरक्षण संविधान का उल्लंघन है और समुदाय के हितों के खिलाफ है।

याचिकाकर्ता के गंभीर आरोप

अधिवक्ता नकवी ने अपनी याचिका में सरकार के इस कदम को "नस्ली भेदभाव" करार दिया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि प्रतिवादी (सरकार) अल्पसंख्यक समुदाय के साथ भेदभाव कर रही है, जो संविधान के मौलिक अधिकारों का हनन है। Muslim Reservation खत्म करने के पीछे सरकार के पास कोई ठोस या उचित तर्क नहीं है। यह फैसला राजनीतिक रूप से प्रेरित है और एक बड़े वर्ग को मुख्यधारा से वंचित करने की कोशिश है।

Muslim Reservation: कब क्या हुआ?

याचिका में इस मुद्दे की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का भी जिक्र किया गया है। जुलाई 2014 में तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी (अविभाजित) सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए मराठा समुदाय के लिए 16% और मुस्लिम समुदाय के लिए 5% आरक्षण की घोषणा की थी। उस समय दोनों समुदायों को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग की श्रेणी में रखा गया था।

जब इस अध्यादेश को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, तब अदालत ने नौकरियों में आरक्षण पर रोक लगा दी थी, लेकिन शैक्षणिक संस्थानों में मुस्लिम समुदाय के लिए 5% आरक्षण को बरकरार रखा था। इसके बावजूद, देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार ने 17 फरवरी के जीआर के जरिए पिछले सभी अध्यादेशों को रद्द कर दिया, जिसे अब चुनौती दी गई है।

Navbharat Live
navbharatlive.com