नवभारत संपादकीय: महाराष्ट्र में कर्ज मुक्ति से कितने किसानों को लाभ? 2 लाख की माफी में फंसा शर्तों का पेंच
Maharashtra Farmer Loan Waiver: महाराष्ट्र सरकार ने शर्तों के साथ 2 लाख तक की किसान कर्जमाफी को मंजूरी दी है, लेकिन कड़े नियमों और चुनावी वादों के बीच किसान नेताओं ने पूर्ण कर्जमाफी की मांग उठा दी है।
- Written By: आकाश मसने
महाराष्ट्र में किसान कर्जमाफी (डिजाइन फोटो)
Maharashtra Farmer Loan Waiver Eligibility Rules: महाराष्ट्र सरकार ने शर्तों के साथ किसानों का 2 लाख म रुपए तक कर्ज माफ कर दिया है। इससे प्रश्न उठते हैं कि कर्जमाफी का प्रत्यक्ष लाभ मिलने में कितना समय लगेगा? सरकारी प्रक्रिया कैसी रहेगी? सामने खरीफ सीजन है। क्या उसमें कर्जमाफी का लाभ मिलेगा? बैंकों को पैसे कब और कैसे मिलेंगे। भविष्य में कर्ज अदा करने पर इसका परिणाम होगा क्या? फिर से कर्जमाफी की उम्मीद बढ़ेगी क्या? कर्जमाफी के अलावा भी कोई उपाययोजना की जाएगी क्या? कर्जमाफी का विकास कार्यों पर असर होगा क्या?
वास्तव में किसानों के हित को देखते हुए स्थायी उपाय योजनाओं की जरूरत है। जैसे कि गारंटी मूल्य (MSP) देते हुए प्रभावी खरीदी व्यवस्था, कृषि सिंचाई की व्यवस्था, फसल बीमा योजना में सुधार, कम ब्याज दर पर आसानी से कर्ज, मूल्यवर्धन और कृषि उत्पन्न प्रक्रिया उद्योग, कृषकों की उत्पादन कंपनियां, बाजार में सीधा प्रवेश, फसलों का विविधिकरण, गोदामों व शीतगृहों की स्थापना, सुधरे हुए बीजों और खाद की समय पर मदद। कुछ अन्य बातें आवश्यक हैं जैसे कि किसानों के लिए कर्जमाफी का स्वतंत्र पोर्टल, पात्र किसानों की सूची तैयार करना, माफी की रकम का सीधे कर्ज खाते में समायोजन।
नियमित कर्जदारों के साथ अन्याय?
कर्जमाफी योजना में किसानों को नकद रकम नहीं दी जाएगी। यह सीधे उनके खाते में जमा कर दी जाएगी। बैंक की ओर से किसानों को ‘कर्ज बंद’ का संदेश आने पर माना जाएगा कि कर्जमाफी का पूरा लाभ मिल गया। नियमित कर्जदारों को भी केवल 50,000 रुपए दिए जाएंगे। उनके लिए न्यूनतम 2 वर्ष नियमित कर्जदार होने की शर्त है। चुनाव के पहले सातबारा कोरा करने का आश्वासन दिया गया और अब अधिकांश किसानों को सिर्फ 50,000 रुपए देने की बात की जा रही है।
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कर्जमाफी की शर्ताें को हटाने की मांग
किसान नेताओं ने कर्जमाफी के लिए लगाई गई शर्त हटाने की मांग की है तथा सभी किसानों को पूर्ण कर्जमाफी की मांग की है। जिन किसानों ने ईमानदारी से 2022-23 व 2023-24 की कर्ज की रकम भर दी है उन्हें 50,000 से लेकर 1 लाख रुपए तक प्रोत्साहन अनुदान दिया जाना चाहिए। चुनाव के समय सभी पार्टियां किसानों को कर्जमाफी का आश्वासन देती हैं। इसे देखते हुए कुछ किसान अपना नुकसान टालने के लिए कर्ज अदा करना टाल देते हैं। शून्य ब्याज दर पर कर्ज देने वाली योजना के पैसे भी भरने में सरकार की ओर से एक-डेढ़ वर्ष विलंब किया जाता है। इससे बैंकों का कारोबार प्रभावित होता है।
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वास्तव में कोई भी सरकार सात-बारा कोरा नहीं करती। सरकार पहले किसानों की लूट होने देती है, बाद में योजना घोषित करती है। योजना में ऐसे प्रावधान है कि किसान कर्जमाफी का पात्र होने की बजाय अपात्र हो जाता है। जिन्होंने 2019 की योजना का लाभ उठाया है, उन्हें इस बार पूर्ण कर्जमाफी नहीं मिलेगी।
