महाराष्ट्र किसान कर्जमाफी (डिजाइन फोटो)
Farmer Loan Waiver Scheme: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के बजट में किसानों का 2 लाख रुपये से कम बकाया कर्ज माफ करने की घोषणा की। पिछले खरीफ के मौसम में महाराष्ट्र में अतिवृष्टि होने से किसानों को बहुत नुकसान हुआ था। केले, संतरे, अंगूर, पपीते आदि की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई थीं। फलबाग वाले किसानों को अधिक कर्ज लेना पड़ा था। यदि किसान का कर्ज 2 लाख से 20-25 हजार रुपये ज्यादा हुआ, तो वह कर्जमाफी योजना के लिए अपात्र ठहरा दिया जाएगा। इस संबंध में भी सहानुभूति से विचार किया जाना चाहिए।
कर्जमाफी की घोषणा से ऐसा लगता है मानो सरकार किसान पर उपकार कर रही है। जिन शहरी लोगों को कृषि की जोखिम की जानकारी नहीं है, वह ऐसा ही समझते हैं। वास्तव में यह किसानों से की गई लूट की वापसी है। बीज, खाद, कीटनाशक के अलावा मजदूरी महंगी होने से कृषि की लागत काफी बढ़ गई है। अतिवृष्टि या सूखा जैसी प्राकृतिक आपदा किसानों की मेहनत पर पानी फेर देती है।
सरकार आयात की अनुमति देकर या निर्यात बंदी लगाकर कृषि उपज का भाव घटा देती है। किसान को इस घाटे की भरपाई के लिए कर्जमाफी की जाती है, तो यह कोई एहसान नहीं है। लोगों को सरकार सस्ता माल व सब्सिडी देती है। उनकी कर्ज वसूली टाली जाती है। जनता को सस्ता अनाज मिले, इसलिए सरकार बार-बार कृषि नीति में हस्तक्षेप करती है। यदि कृषि संकट कम करना है, तो उत्पादन लागत के आधार पर कृषि उपज का मूल्य तय किया जाना चाहिए। कृषि बीमा योजना ईमानदारी से लागू कर नुकसान भरपाई सही तरीके से दी जानी चाहिए। जमीन अधिग्रहण की जाए तो उचित मुआवजा तत्काल मिलना चाहिए, सिर्फ कर्जमाफी कर देने से कृषि संकट टलने वाला नहीं है। यदि खेती से अपर्याप्त आय होती है, तो किसान को पूरक व्यवसाय उपलब्ध कराना होगा। मुर्गी, बकरी पालन, मछली पालन, दुग्ध व्यवसाय को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है।
इस समय घोषित की गई कर्जमाफी का मामला कुछ अलग है। शुरू में किसानों ने कर्जमाफी की मांग नहीं की थी। सत्ता में आने के लिए बीजेपी की ओर से देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की थी कि हमारी सरकार सत्ता में आते ही कर्जमाफी कर देगी। इसे देखते हुए किसानों ने कर्ज अदा नहीं किया। इससे सोसाइटी व जिला बैंक दिक्कत में आ गए। दूसरी ओर चुनाव जीतने के बाद सत्ताधारी अपना कर्जमाफी का वादा भूल गए, जब किसान संगठनों ने आंदोलन किया व किसान नेता सड़कों पर आए, तब सरकार को झुकना पड़ा और 2 लाख रुपये से कम का कर्ज माफ करने की घोषणा की गई। नियमित कर्ज अदा करने वाले किसानों को 50,000 रुपये प्रोत्साहन अनुदान देने की बात कही गई। नियमित कर्जदार कोई धनवान किसान नहीं होते। खेती में नुकसान उन्हें भी उठाना पड़ता है। मार्च के अंत तक कर्ज भरने पर सरकार की ब्याज माफी योजना का लाभ मिलता है, इसलिए वह इधर-उधर से रकम जुटाकर जैसे-तैसे कर्ज भरते हैं। कर्जमाफी योजना में नियमित कर्जदार के रूप में ऐसे किसान अलग रखे जाते हैं।
अतिवृष्टि पीड़ित किसानों को दिलासा देने के लिए कर्जमाफी की मुद्दत 30 जून 2026 तक बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। इसी तरह फल बागायतदार किसानों को 2 लाख से कुछ अधिक कर्ज होने पर भी राहत दी जाए तो उपयुक्त रहेगा। अमेरिका में किसानों को भरपूर सबसिडी तथा अन्य रियायतें दी जाती हैं। ताकि वो खेती करना छोड़कर शहरों में रहने न आ जाएं। उन्हें आर्थिक दृष्टि से संतुष्ट रखा जाना है। यदि फसल ज्यादा हो जाती है तो जरूरत से ज्यादा अनाज समुद्र में फिकवा दिया जाता है। ताकि भाव न गिर ना पाए। कृषि उपयोगी मशीनरी, हार्वेस्टर आदि उपलब्ध कराते हुए खेती को आसान व फायदेमंद बनाया जाता है। सरकार किसान हितों को प्राथमिकता देकर फार्मर्स मार्केट को प्रोत्साहन देती है।
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शुरू में किसानों ने कर्जमाफी की मांग नहीं की थी। सत्ता में आने के लिए बीजेपी की ओर से देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की थी कि हमारी सरकार सत्ता में आते ही कर्जमाफी कर देगी। इसे देखते हुए किसानों ने कर्ज अदा नहीं किया। इससे सोसाइटी व जिला बैंक दिक्कत में आ गए। दूसरी ओर चुनाव जीतने के बाद सत्ताधारी अपना कर्जमाफी का वादा भूल गए। जब किसान संगठनों ने आंदोलन किया व किसान नेता सड़कों पर आए, तब सरकार को झुकना पड़ा।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा