LPG Shortage Commentary: नवभारत डिजाइन फोटो
LPG Shortage Commentary: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, कहावत है घर-घर में मिट्टी के चूल्हे रहते हैं। इसका तात्पर्य है कि हर घर में कोई विवाद, मतभेद या छोटा-मोटा झगड़ा चलता है। इसलिए किसी की आलोचना करना ठीक नहीं है, बर्तन साथ में रहेंगे तो टकराएंगे ही।’
हमने कहा, ‘रसोई गैस के संकट में आपको चूल्हे की याद आ गई। लोग गुस्से में यह भी कहते हैं कि हमारी बात नहीं मानते तो चूल्हे में जाओ। किसी को निकम्मेपन के लिए डांटी तो वह उल्टा जवाब देता है में क्या अब तक भाड़ झोंक रहा था।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, इस समय बात चूल्हे की हो रही है। चूल्हा मानव का बड़ा आविष्कार है। आदिमानव ने चकमक पत्थर रगड़कर तीन पत्थरों के चूल्हे में लकड़ियों को जलाया और शिकार को भूनकर खाया। अब भी चाहो तो 3 ईंटें रखकर चूल्हा बना लो।’
हमने कहा, ‘पंजाब में सांझा चूल्हा होता है। अपने घरों से महिलाएं, गूंथा हुआ आटा लेकर आती हैं और वहां बारी-बारी से रोटियां बना लेती हैं, आपस में उनकी बातचीत भी चलती रहती है। ब्लैक एंड व्हाइट टीवी के जमाने में सांझा चूल्हा नामक सोप ऑपेरा या सीरियल हमने देखा था। गांव-देहात में जहां जलाऊ लकड़ी, गोबर के कंडे, कपास या तुअर की फसल के डंठल आसानी से मिल जाते हैं, वहां अब भी चूल्हा जलाया जाता है। हाईवे में पड़ने वाले ढाबे में लकड़ियों से तंदूर जलाया जाता है। उसमें तंदूरी रोटी बनती है। बारबेक्यू करने के लिए सलाख में पनीर, शिमला मिर्च, टमाटर लगाकर कोयले की आंच पर सेका जाता है। चूल्हे के खाने का स्वाद ही अलग होता है। आप मटका रोटी खाकर देखिए तो पता चलेगा। गैस के संकट की वजह से लोग फिर केरोसिन के स्टोव, कोयले की सिगड़ी और लकड़ी के चूल्हे पर वापस लौटेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने गरीबों और ग्रामीणों के लिए उज्ज्वला योजना शुरू की थी ताकि महिलाओं को चूल्हा फूंकने से उठने वाले धुएं से राहत मिले लेकिन उन्हें क्या पता था कि ईरान युद्ध के कारण गैस की कमी से जूझना पड़ेगा।’
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पड़ोसी ने कहा, ‘कभी चूल्हे का जिक्र फिल्मी गाने में भी होता था। महमूद का गाना आपको याद होगा मेहबूबा मेहबूबा, बनालो मुझे दूल्हा, जला दो मेरा चूल्हा।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा