Middle East conflict (सोर्सः सोशल मीडिया)
Iran Israel tension: अमेरिका और इजराइल ने अपनी राह के सबसे बड़े रोड़े अयातुल्ला खामेनेई को परिवार सहित मौत के घाट उतार दिया। इसके साथ ही 36 वर्षों से ईरान की सत्ता पर काबिज खामेनेई के शासन का अंत हो गया। इससे मध्यपूर्व में खूनखराबा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी ‘मैक्सिमम प्रेशर 2.0’ नीति के तहत ईरान में परमाणु हथियार बनाने में लगी इकाइयों को नेस्तनाबूद करने पर उतारू हैं।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने संदेह जताया है कि ईरान परमाणु अस्त्र बनाने के करीब पहुंच रहा है। वह यूरेनियम का वेपन-ग्रेड संवर्धन करने के निकट बताया जा रहा है। अमेरिका और इजराइल पिछले कई महीनों से ईरान पर हमले की तैयारी कर रहे थे। ट्रंप प्रशासन लगातार ईरानी जनता को अपनी सरकार के खिलाफ उकसाता रहा है।
तेहरान में आर्थिक तंगी और सरकार के अत्याचारों के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों का पुलिस, सेना और नेशनल गार्ड द्वारा कठोर दमन किया गया। जून 2025 में इजराइल ने ईरान की कुछ परमाणु इकाइयों को मिसाइल हमलों से क्षतिग्रस्त कर दिया था, हालांकि ईरान ने उनके पुनर्निर्माण की दिशा में कदम उठाए।
ईरान समर्थित हिजबुल्लाह और हमास जैसे संगठनों को पहले ही भारी नुकसान पहुंचाया जा चुका है। इसके बावजूद इराक और यमन में ईरान समर्थक हूती जैसे संगठन सक्रिय हैं। ईरान शिया बहुल देश है, जबकि इजराइल ने सुन्नी अरब देशों से अपने संबंध मजबूत किए हैं।
अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई का सऊदी अरब ने समर्थन किया है, लेकिन उसने स्पष्ट किया है कि वह अपनी भूमि या वायुसीमा का उपयोग ईरान पर हमले के लिए नहीं होने देगा। चीन और रूस ने इस हमले की निंदा की है। इन दोनों देशों का ईरान में बड़ा आर्थिक और रणनीतिक निवेश है।
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मध्यपूर्व की अशांति से भारत भी चिंतित है। वहां 90 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं। संघर्ष के माहौल में उड़ानें रद्द होने से सैकड़ों यात्री फंस गए हैं। ईरान भी अरब देशों में अमेरिकी सैनिक अड्डों पर मिसाइलें दाग रहा है।
भारत के पास केवल लगभग 74 दिनों का तेल भंडार है। यदि युद्ध भड़कता है और होरमुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होती है, तो भारत को रूस से तेल आयात बढ़ाना पड़ सकता है। भारत के लिए स्थिति असमंजस की है, क्योंकि उसके ईरान और इजराइल दोनों से करीबी संबंध हैं। ईरान के चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत ने निवेश किया है, जो व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, वहीं इजराइल के साथ भी मोदी सरकार ने आत्मीय संबंध मजबूत किए हैं।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा