Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो

  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

नवभारत विशेष: हल नहीं हुआ ईरान के नये शासन का मसला

Iran Power Struggle: ईरान-इजराइल-अमेरिका तनाव के बीच ईरान के में भी सत्ता संघर्ष तेज है। रजा पहलवी से लेकर मुजाहिदीन-ए-खल्क व कुर्द गुट सक्रिय हैं, युद्ध के 3 संभावित राजनीतिक परिदृश्य सामने आ रहे हैं

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Mar 14, 2026 | 07:09 AM

Iran Regime Change Scenarios ( सोर्स: सोशल मीडिया )

Follow Us
Close
Follow Us:

Iran Regime Change Scenarios: ईरान में एक प्रत्यक्ष जंग के पीछे एक अप्रत्यक्ष जंग भी जारी है। यह जंग ईरान के भीतर कुछ गुटों के बीच चल रही है। पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी से लेकर मुजाहिदीन-ए-खल्क और कुर्द संगठनों तक। इस बहुपक्षीय जंग का भी लक्ष्य है ईरान की सत्ता पर कब्जा। ईरान इजराइल और अमेरिकी संघर्ष अनंत काल तक नहीं चलेगा।

ट्रंप का ऐलान है कि ईरान से बिना शर्त समर्पण के अलावा कोई समझौता, युद्धविराम वगैरह नहीं होगा, युद्ध लगातार चला तो कुछ महीनों में खत्म भी होगा।

युद्ध के नतीजों का पहला परिदृश्य बनता है कि ईरान की सेना और आईआरजीसी बिना शर्त पूर्ण आत्मसमर्पण कर दे और एकजुट विपक्षी गुट रजा पहलवी की अगुवाई में अंतरिम सरकार बनाए, दूसरा, ईरान में आने वाला नया नेतृत्व पूरी तरह आत्मसमर्पण के बजाय परमाणु तथा मिसाइल कार्यक्रमों पर कुछ समझौता करे, अमेरिका पीछे हटकर इजराइल को निगरानी सौंपे कि उल्लंघन पर वह हमले करेगा।

सम्बंधित ख़बरें

खत्म होने वाली है LPG की किल्लत, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकल रहे दो टैंकर, अलर्ट मोड में नौसेना के युद्धपोत

Mosaic Defense: जनरल अली जाफरी की वो रणनीति जिसने अमेरिका-इजराइल के हमलों को किया नाकाम

13 दिन बाद फिर उड़ी शारजाह-नागपुर फ्लाइट, 174 यात्री पहुंचे ऑरेंज सिटी; दोहा उड़ानें 31 मार्च तक बंद

नवभारत संपादकीय: अब CEC के खिलाफ महाभियोग का प्रयास

तीसरा, शासन अपनी आंतरिक काउंसिल के माध्यम से स्थिति को संभाल ले। ईरान मिसाइल और ड्रोन हमलों से लड़ता रहे और इस बीच एक नया सर्वोच्च नेता चुन ले। आईआरजीसी सत्ता थाम ले यानी सैन्य शासन हो जाए और वह अमेरिका प्रेरित विद्रोह को कड़ाई से दबाए।

चौधा परिदृश्य यह कि यह कि युद्ध लंबा खिंचते देख अमेरिका कुदाँ और ईरानी सत्ता के दूसरे विरोधी धड़ों को भड़का दे। कुर्दी और अजेरी लोगों के बीच अस्थिरता फैल जाए जिसके साथ लूर, अरब, बलोच, जेरी भी शामिल हो जाएं, देश गृहयुद्ध तथा आंतरिक कलह एवं हिंसा में जलने लगे।

देश लीबिया जैसा टूट जाए या सीरिया सा बिखर जाए। ट्रंप की पोस्ट-वॉर रणनीति भी यही है। ईरानी सेना और आईआरजीसी पूरी तरह समर्पण कर दे बहुत मुमकिन नहीं। क्योंकि इस्लामी गणराज्य की संस्थाएं अभी भी मजबूत हैं और सत्ता परिवर्तन का रास्ता उतना सरल नाहीं है, जितना बाहर से दिखता है।

पहलवी को संयुक्त विपक्ष द्वारा नेता स्वीकारने की संभावना भी कम है। इस संक्रमण के दौर में रजा पहलवी युद्ध से पहले से खुद को ‘संक्रमणकालीन नेता’ के तौर पर पेश कर रहे हैं। फिलहाल उन्होंने ईरानी जनता को संदेश दिया है कि सतर्क रहें और उचित समय पर अंतिम कार्रवाई के लिए सड़कों पर लौटने को तैयार रहें।

वे राजशाही के बजाए एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करने का वादा कर रहे हैं। लेकिन पहलवी की राह आसान नहीं है। उनकी सबसे बड़ी कमजोरी उनकी ‘विभाजनकारी’ छवि है।

आरोप है कि वे अमेरिका और इजराइल के हस्तक्षेप को ‘मुक्ति’ का जरिया मानते हैं। ईरान का एक बड़ा वर्ग इसे ‘देशद्रोही’, और ‘विदेशी कठपुतली’ के बतौर देखता है।

रजा पहलवी के पास ईरान के भीतर कोई मजबूत संगठनात्मक ढांचा भी नहीं है, दूसरा गुट इस्लामी गणराज्य के खिलाफ संघर्ष करते रहने वाला ‘नेशनल काउंसिल ऑफ रेजिस्टेंस ऑफ ईरान है, मरियम रजवी की अगुवाई वाले इस गुट की जड़ें विद्रोही संगठन मुजाहिदीन-ए-खल्क में हैं।

यह भी ईरान को एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने, मृत्युदंड समाप्त करने, महिलाओं और अल्पसंख्यकों को समान अधिकार देने तथा परमाणु कार्यक्रम समाप्त करने जैसे वादे करता है, लेकिन इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि विवादास्पद है। 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान यह सद्दाम हुसैन का सहयोगी था, सो ईरानियों के मन में इसके प्रति अविश्वास ज्यादा है।

कुछ गुटों के बीच संघर्ष जारी

मरियम रजवी या पहलवी जैसे नेता विदेशी मीडिया में भले ही चर्चित हों, लेकिन ईरान के अंदर उनकी वास्तविक राजनीतिक पकड़ सीमित है। वैसे भी तभी सत्ता में आ सकते हैं, जब अमेरिका जमीनी सेना उतारे।

यह भी पढ़ें:-नवभारत निशानेबाज: दिमाग पर सवार होता शैतान तो खोजता युद्ध का मैदान

लेकिन जैसा कि अफगानिस्तान और इराक में देखा गया, ऐसी सरकारें कभी भी ‘वैधता’ हासिल नहीं कर पातीं, तीसरा महत्वपूर्ण खिलाड़ी कुर्द संगठन हैं। ट्रंप इन्हें ही अपना मोहरा बनाना चाहते हैं। हाल ही में ‘कोअलिशन ऑफ पॉलिटिकल फोर्सेज ऑफ ईरानी कुर्दिस्तान’ नामक गठबंधन के तहत पांच प्रमुख कुर्द संगठन राजनीतिक मंच बनाकर कुर्दा के अधिकारों और स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं।

लेख- संजय श्रीवास्तव के द्वारा

Iran power struggle reza pahlavi irgc opposition groups war scenarios

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Mar 14, 2026 | 07:09 AM

Topics:  

  • Iran
  • IRGC
  • Israel Iran Tension
  • Latest Hindi News
  • Middle East
  • Navbharat Editorial
  • US Iran Tensions

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.