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भारतीय टीम की एकजुटता, एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में 5वीं बार जीत

ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद भारतीय हॉकी टीम ने चीन को पछाड़ कर एशियन चैंपियनशिप ट्रॉफी जीत ली। खेल के सभी पहलुओं में भारतीय टीम ने अपनी कुशलता व महारत सिद्ध कर दी है। दक्षिण कोरिया, मलयेशिया में हॉकी आर्थिक तंगी का शिकार बन गई है।

  • By मृणाल पाठक
Updated On: Sep 20, 2024 | 04:11 PM

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ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद भारतीय हॉकी टीम ने चीन को पछाड़ कर एशियन चैंपियनशिप ट्रॉफी जीत ली। खेल के सभी पहलुओं में भारतीय टीम ने अपनी कुशलता व महारत सिद्ध कर दी है। दक्षिण कोरिया, मलयेशिया में हॉकी आर्थिक तंगी का शिकार बन गई है। भारत ने केवल एशियाई टीमों को ही नहीं बल्कि आस्ट्रेलिया और यूरोपीय टीमों को भी हटाया है। भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह के कुशल नेतृत्व और टीम की एकजुटता से भारत रिकार्ड कायम करते हुए 5वीं बार एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी जीतने में सफल हुआ।

फाइनल मुकाबला काफी रोमांचक व तनावपूर्ण था। चीन की टीम ने कड़ी चुनौती पेश की थी जिससे गोल कर पाना आसान नहीं था। अंततः जुगराज सिंह के अंतिम क्षणों में किए गए गोल की मदद से भारत ने चीन को 1-0 से हराया। पेरिस ओलंपिक में 10 गोल करनेवाले कप्तान हरमनजीत सिंह ने अपने खेल से सहयोगियों को लगातार प्रभावित किया। भारत ने एशियाई चैंपियनशिप में कुल 26 गोल किए जिनमें से 7 गोल अकेले हरमनप्रीत ने दागे। उन्होंने सारे गोल पेनाल्टी कार्नर पर किए। भारत लंबे समय से पेनाल्टी कार्नर विशेषज्ञ की कमी से जूझता रहा।

यह भी पढ़ें- जनगणना की चुनौती, निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन भी होगा

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पुराने खिलाड़ियों में पृथीपाल सिंह, बलबीरसिंह के नाम मशहूर थे। धनराज पिल्ले पर भी भारत को बहुत भरोसा था। लेस्ली वलाडियस भी शानदार खिलाड़ी थे। इतने पर भी समय के साथ प्राने खिलाड़ी रिटायर होते हैं और टीम में नए चेहरों के साथ बदलाव आता है। भारत में आमतौर पर पंजाब, झारखंड व यूपी में हॉकी ज्यादा खेली जाती है। ध्यानचंद और रूपसिंह के जमाने में हॉकी का स्वर्णयुग था। ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता था। 1936 के बर्लिन ओलंपिक में ध्यानचंद की हॉकी स्टिक से चॉल चिपके रहता देखकर और उनकी ड्रिबलिंग से हिटलर भी चकित रह गया था।

उसने यह देखने के लिए ध्यानचंद की हॉकी स्टिक मांगी थी कि कहीं उसमें कोई चुंबक तो नहीं लगा है। हिटलर ने ध्यानचंद से यह भी कहा था कि जर्मनी आ जाओ, तुम्हें अपनी फौज का फील्ड मार्शल बना देता हूं। केडी सिंह बाबू भी नामी हॉकी खिलाड़ी थे। हॉकी टीम की असली ताकत उसकी एकजुटता और खिलाड़ियों का एक-दूसरे पर भरोसा होना है। इसी से सफलता मिलती है। परंपरागत भारतीय हॉकी शैली में कलाई का कौशल देखने को मिलता था और हमारे खिलाड़ी प्रतिद्वंद्वी को छकाते थे। बाद में हॉकी पर यूरोपीय शैली हावी हो गई और ताकत के साथ लंबे शॉट मारे जाने लगे। भारतीय खिलाड़ियों ने स्वयं को उस शैली में भी डाल लिया।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा

Indian hockey team victory for the 5th time in asian champions trophy

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Published On: Sep 20, 2024 | 04:11 PM

Topics:  

  • Asian Champions Trophy

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