नवभारत विशेष: अमेरिका से ट्रेड डील में फायदा या समर्पण
India US Trade: विपक्ष ने कहा कि अमेरिका से 500 अरब डॉलर आयात का कोई रोडमैप नहीं है। सरकार का दावा है कि कृषि और डेयरी सेक्टर को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
India US Trade Deal: विपक्ष का यह भी कहना है कि अगले 5 वर्षों में हमें अमेरिका से 500 अरब डॉलर का आयात करना है यानी भारत को अपना आयात तीन गुना बढ़ाना पड़ेगा। इसके लिए हमें हर साल अमेरिका से 40 से 42 अरब डॉलर के आयात को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करना पड़ेगा। सरकार के पास स्पष्टता नहीं है कि हर साल जो 58 से 60 अरब डॉलर का अतिरिक्त आयात क्या होगा? अमेरिका का कहना है कि भारत के साथ व्यापार में उसे करीब 60 अरब डॉलर का नुकसान हो रहा है।
इसलिए भारत को आयात बढ़ाना जरूरी है। दूसरी तरफ शिवराज सिंह चौहान और पीयूष गोयल ने एक्स पर जारी अपने बयानों में स्पष्ट किया है कि सरकार ने कृषि और डेयरी क्षेत्र की पूरी तरह से रक्षा की है।
पीयूष गोयल के मुताबिक मक्का, गेहूं, चावल, सोया, मुर्गी पालन, दूध, पनीर, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस जैसी संवेदनशील कृषि व डेयरी उत्पादों की पूरी तरह से रक्षा की है।
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इसी तरह शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक सरकार ने सोयाबीन, चीनी, अनाज, केला, स्ट्रॉबेरी, चिप्स, खट्टे फल, हरी मटर, काबुली चना, मूंग जैसे उत्पादों पर कोई टैरिफ छूट नहीं दी है यानी सरकार का कहना है कि हमारी मुख्य फसलों और डेयरी उत्पादनों के लिए, अमेरिका के लिए कोई द्वार नहीं रखोला गया।
यही नहीं भारत से कई कृषि उत्पाद अमेरिका को जीरो ड्यूटी पर दिए जाएंगे, जिनमें चाय, कॉफी, नारियल, सुपारी, काजू, एवोकाडो, केला, आम, कीवी, पपीता और अनानास शामिल हैं। लेकिन सरकार यह स्पष्ट नहीं कर रही कि भारत पर हर साल जो 58 से 60 अरब डॉलर आयात बढ़ाने का प्रेशर है, उसके लिए सरकार आखिर क्या खरीदेगी? सरकार ताल ठोक करके यह कह रही है कि यह पूरी तरह से हमारे पक्ष की डील है, तो दूसरी तरफ विपक्ष जोरदार ढंग से यह कह रहा है कि सरकार ने आत्म समर्पण कर दिया है।
लेकिन आम आदमी इन दोनों बातों को कैसे समझे? अगर हम तेजी से दुनिया के बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाकर भारत की अर्थव्यवस्था को अगले कुछ वर्षों में दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनाना चाहते हैं, तो भला हम किस आधार पर विदेशी कंपनियों के कारोवार या विदेशों के साथ देश के कारोबार को कैसे रोक सकते हैं? भारत और अमेरिका के बीच 2023-24 में 190 बिलियन डॉलर का कारोबार हुआ, जिसमें भारत और अमेरिका के बीच 65।35 का अनुपात था।
ऐसे में अमेरिका इस तरह तो सोचेगा ही कि उसका भी कारोबार बढ़े। भारत और अमेरिका के बीच अगर 2030 तक कारोबार को बढ़ाकर 500 बिलियन तक ले जाना है, तो जाहिर है इस बढ़े कारोबार से दोनों देशों को फायदा होगा। क्योंकि इस कारोबार में अभी तक जो तीन बड़ी बाधाएं थी जिनमें टैरिफ, मार्केट एक्सेस और टेक्नोलॉजी व डाटा से जुड़े नियम थे, इन्हें ढील तो देनी ही पड़ेगी अगर कारोबार को बढ़ाना है।
ऐसा नहीं हो सकता कि हम अपने बाजार में तो अमेरिका को घुसने से रोकें और खुद अमेरिका के समृद्ध बाजार का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाना चाहें। अगर अमेरिका चाहता है और दबाव बनाता है कि भारत अपने उन क्षेत्रों को भी उसके लिए खोले, जिसे आजतक हमने बंद कर रखा है, तो हमें भी चाहिए कि हम अमेरिका पर इस तरह का प्रेशर बनाएं कि सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन से लेकर डिफेंस प्रोडक्शन तक में वो हमें अपना रणनीतिक और तकनीकी साझेदार बनाए।
हर वर्ष 58 से 60 अरब डॉलर का आयात कैसे होगा ?
यह सवाल पूछने और सुनने में जितना आसान है, इसका जवाब सचमुच में उतना ही जटिल है। पिछले दिनों जब भारत और अमेरिका के बीच अंततः कई महीनों से लटकी ट्रेड डील वास्तव में संपन्न हो गई, तो वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार ने संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों में भारतीय किसानों की पूरी तरह से रक्षा की है।
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कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा का कहना है, ‘अमेरिका ने 3 फीसदी के टैरिफ को बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया और अब घटाकर उसे 18 फीसदी किया, तो मोदी सरकार खुश हो रही है, जबकि उसने हमारे द्वारा रूस से तेल खरीदने पर पाबंदी लगा दी है। अगर हमने इस पाबंदी के बावजूद तेल खरीदा तो यह भी कहा है कि दोबारा से टैरिफ लागू कर दिया जाएगा,’
-लेख लोकमित्र गौतम के द्वारा
