नवभारत संपादकीय: संतुलित विदेश नीति पर चल रहा देश

India Iran Policy: खाड़ी तनाव के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र में जीसीसी देशों पर ईरान के हमलों की निंदा का प्रस्ताव सहप्रायोजित किया, वहीं कूटनीतिक संतुलन बनाए रखते हुए ईरान से संवाद भी जारी रखा।
Navabharat Editorial: The Nation Pursues a Balanced Foreign Policy
India Middle East Diplomacy ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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India Middle East Diplomacy: यद्यपि भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों पर ईरान व्दारा किए गए हमलों की निंदा करने वाले प्रस्ताव को सहप्रायोजित किया, लेकिन दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया की गंभीर स्थिति पर ईरान के राष्ट्रपति से चर्चा भी की।

विदेशमंत्री एस. जयशंकर ने भी ईरानी विदेशमंत्री से फोन पर 2 बार बातचीत की। इसी दौरान होर्मुज की खाड़ी से 1 ऑयल टैंकर मुंबई पहुंच गया और भारत का झंडा लगे 2 जहाजों को इस्लामी रिवोल्यूशनरी गा ने खाड़ी से होकर जाने के लिए हरी झंडी दे दी।

इजराइल से अपनी दोस्ती के बावजूद भारत ने ईरान से अपने पुराने संबंध कायम रखे हैं। तेल के बदले अनाज दिया था। दोनों देशों के प्राचीन आपसी संबंधों का भी उल्लेख किया जाता है।

खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों का मुद्दा अमेरिका व इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले से बिल्कुल अलग है। ईरान खाड़ी के 7 सुन्नी देशों पर इसलिए हमले कर रहा है क्योंकि उनके यहां अमेरिकी सैनिक अड्डे हैं तथा उनकी अमेरिका से दोस्ती बनी हुई है।

सं.रा. सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव है कि जॉर्डन ने अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ा तथा सुरक्षा को गंभीर क्षति पहुंचाई। इस प्रस्ताव में 28 फरवरी को अमेरिका व इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों का कोई जिक्र नहीं है। भारत के रुख या नीति में कोई बदलाव नहीं है।

वह किसी देश के ऐसे फौजी हमले की आलोचना करता है जो नागरिक आबादी के लिए संकट पैदा करता है। जब इजराइल ने हमास के उग्रवादियों के खिलाफ गाजा में सैनिक कार्रवाई की थी तब भी भारत ने नागरिक आबादी को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाकर लड़ाई तुरंत रोकने की अपील की थी।

ठीक यही नीति ईरान के खाड़ी देशों पर हमलों को लेकर अपनाई जा रही है। भारत ने न तो अमेरिका और इजराइल का पक्ष लिया है न ईरान का। दशकों से भारतीय विदेश नीति में रणनीतिक संतुलन अपनाया जाता रहा है।

जब 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइली शहरों पर अचानक हमला किया था तब भारत पहला देश था जिसने आंतक के खिलाफ कदम उठाने के इजराइल के अधिकार का समर्थन किया था।

जब इजराइल ने गाजा में बेगुनाह लोगों पर हमले शुरू किए तो भारत ने यूएन में तत्काल युध्द विराम के प्रस्ताव का समर्थन किया था। भारत हर समय शांति का पक्षधर रहा है।

भारत के खाड़ी देशों से निकट संबंध हैं जहां लाखों भारतीयों को रोजगार मिला हुआ है। इन देशों से भारत के ऊर्जा एवं व्यावसायिक संबंध काफी मजबूत है। यह बात अलग है कि यह राष्ट्र इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी के सदस्य हैं तथा कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ हैं।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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