मिडिल ईस्ट में भीषण जंग: ट्रंप और ईरान ने युद्धविराम की कोशिशों को ठुकराया, तेल कीमतें आसमान पर

Iran US Conflict: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध तेज हो गया है। ट्रंप और ईरान दोनों ने ही सीजफायर से इनकार किया है, जिससे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और संकट गहरा गया है।
Middle East War Escalates Trump and Iran Reject Ceasefire Talks Amid Rising Oil Prices
ट्रंप और ईरान का सीजफायर से इनकार (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Trump Rejects Iran Ceasefire Talks: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मध्य पूर्वी देशों द्वारा प्रस्तावित युद्धविराम की कूटनीतिक कोशिशों को सिरे से खारिज कर दिया है। उधर ईरान ने भी सख्त लहजा अपनाते हुए साफ कर दिया है कि हमलों के जारी रहने तक कोई बातचीत नहीं होगी। इस टकराव ने वैश्विक तेल बाजार और आम नागरिकों के जीवन पर गहरा संकट पैदा कर दिया है।

शांति प्रयासों की विफलता

ओमान और मिस्र जैसे देशों ने दोनों महाशक्तियों के बीच सुलह कराने के लिए काफी कसरत की थी। लेकिन व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ट्रंप का ध्यान फिलहाल वार्ता पर नहीं बल्कि सैन्य कार्रवाई पर है। न्यूज एजेंसी रायटर्स के मुताबिक दो सप्ताह पहले शुरू हुए हमलों के बाद तनाव अब चरम पर पहुंच गया है।

खार्ग द्वीप पर भीषण हमला

शुक्रवार की रात अमेरिकी सेना ने ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप को अपना मुख्य निशाना बनाया। इस हवाई हमले ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अमेरिका ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने की योजना पर काम कर रहा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि सैन्य दबाव ही ईरान को भविष्य में घुटने टेकने पर मजबूर करने वाला है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट

ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने चेतावनी दी है कि वे दुनिया के महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद रखेंगे। इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित है।

जान-माल का भारी नुकसान

इस भीषण युद्ध में अब तक 2000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें अधिकांश ईरानी नागरिक बताए जा रहे हैं। हवाई हमलों और गोलाबारी के कारण रिहायशी इलाकों में भी भारी तबाही देखने को मिली है जिससे मानवीय संकट पैदा हो गया है। घायलों की संख्या भी हजारों में है और अस्पताल बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।

ईरान की कड़ी शर्तें

ईरान ने साफ कर दिया है कि वह केवल हमलों के रुकने पर ही नहीं बल्कि स्थायी गारंटी मिलने पर ही विचार करेगा। तेहरान ने अमेरिकी हमलों से हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग भी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के सामने प्रमुखता से रखी है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का मानना है कि होर्मुज पर नियंत्रण खोना उनके लिए युद्ध हारने के समान होने वाला है।

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी

व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि उनका सैन्य अभियान जिसे "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" नाम दिया गया है, बिना रुके जारी रहेगा। ट्रंप का मानना है कि ईरान का नेतृत्व अब कमजोर हो रहा है और वे बातचीत के लिए अब छटपटा रहे हैं। लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि फिलहाल बातचीत का समय निकल चुका है और कार्रवाई जारी रहेगी।

भविष्य की अनिश्चितता

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है तो इससे मिडिल ईस्ट का पूरा नक्शा बदल सकता है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद ट्रंप प्रशासन अपने रुख पर अडिग है और पीछे हटने के लिए कतई तैयार नहीं है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विश्व शक्तियां कोई नया कूटनीतिक रास्ता निकाल पाएंगी।